ढाका | बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद तारिक रहमान की नई सरकार में हिंदू समुदाय को बड़ा प्रतिनिधित्व देने की तैयारी चल रही है। चर्चा है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता गोयेश्वर चंद्र रॉय को नई कैबिनेट में महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा जा सकता है। बीएनपी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे दो हिंदू सांसदों में रॉय का नाम सबसे प्रमुख है। ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, रहमान अपनी 40 सदस्यीय संभावित कैबिनेट में अनुभवी और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि देश में एक समावेशी और स्थिर सरकार का संदेश दिया जा सके।
नई सरकार के गठन में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और सलाहुद्दीन चौधरी जैसे दिग्गजों के नाम रेस में हैं, जो पहले भी खालिदा जिया की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इनके साथ ही शमा उबैद और अफरोजा खानम रीता जैसे नए चेहरों को भी जगह मिलने की उम्मीद है। गोयेश्वर चंद्र रॉय का नाम इसलिए भी खास है क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान तारिक रहमान ने वादा किया था कि वे सभी समुदायों को सत्ता में भागीदारी देंगे। रॉय 1978 से पार्टी से जुड़े हैं और बीएनपी की नीति-निर्धारक समिति के अहम सदस्य हैं, जो शेख हसीना के दौर में भी पार्टी के प्रति वफादार रहे।
बांग्लादेश की कुल आबादी में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 9 प्रतिशत है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोयेश्वर चंद्र रॉय को मंत्री बनाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश की छवि एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में मजबूत होगी। रॉय ने ढाका-3 सीट से शानदार जीत दर्ज की है और उनके साथ उनके समधी नितॉय रॉय चौधरी भी संसद पहुंचे हैं। समावेशी भागीदारी के माध्यम से संतुलित विकास का लक्ष्य लेकर चल रही रहमान सरकार के लिए यह कदम हिंदू अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने और देश में सामाजिक सौहार्द बहाल करने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।

