सागर: मध्य प्रदेश में प्रशासनिक इकाइयों को अधिक जनोन्मुखी, सुलभ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग की टीम ने आज सागर जिले का दौरा किया। आयोग की टीम ने विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आवश्यक जानकारियां एकत्रित कीं।शासन से प्राप्त स्वीकृति के अनुसार, इस पूरी पुनर्गठन प्रक्रिया और अध्ययन के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (आईआईपीए) को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। सागर संभाग और जिले में पहुंचे आयोग के दल का नेतृत्व आईआईपीए, नई दिल्ली के सलाहकार राजीव रंजन कर रहे हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के तहत आयोग की टीम ने सागर जिले में कई प्रमुख प्रशासनिक केंद्रों का दौरा किया। जिसमें कलेक्टर कार्यालय, तहसील कार्यालय – राहतगढ़ और विकासखंड कार्यालय – जैसीनगर शामिल रहे। इन सभी स्थलों पर टीम ने प्रशासनिक इकाइयों के मौजूदा बुनियादी ढांचे, कार्यप्रणाली और सेटअप को समझा।इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक इकाइयों की भौगोलिक परिस्थितियों और जनता की अपेक्षाओं के आधार पर एक सुलभ शासन मॉडल तैयार करना है। दौरे के दौरान अधिकारियों और विभाग प्रमुखों से फीडबैक लेने के लिए एक विस्तृत प्रश्नावली भी तैयार की गई है। इस प्रश्नावली के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर अधिकारियों की राय और डेटा जुटाया जा रहा है।
जिला और ब्लॉक स्तर पर सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मानव संसाधन की पर्याप्तता और उनकी क्षमता का आकलन।अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए डिजिटल गवर्नेंस, ई-ऑफिस प्रणाली और जनसेवा निवारण हेतु आवश्यक प्रशिक्षण। नए जिलों या तहसीलों के गठन के लिए जनसंख्या का आकार, भौगोलिक परिस्थितियां (नदियाँ, वन, पहाड़) और परिवहन संपर्क मार्ग जैसे मानकों का निर्धारण।सभी विभाग प्रमुखों को इस संबंध में एक डिजिटल लिंक भी प्रदान की गई है, जिसके माध्यम से वे अपनी प्रतिक्रियाएं और जमीनी सुझाव आयोग के समक्ष ऑनलाइन दर्ज करा रहे हैं। सागर जिले के दौरे और डेटा संकलन के बाद आयोग की टीम अगले चरणों में सागर संभाग के अन्य जिलों (छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और दमोह) का भी रुख करेगी।
