
सिंगरौली । चितरंगी तहसील के कतरिहार गांव की 2015 में फर्जी तरीके से प्रविष्टि एवं हेराफेरी तथा कूटरचित कार्य करने के आरोप में पटवारी राजेश नामदेव पर विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध है। जिसकी जमानत भी हाल ही के दिनों में उच्च न्यायालय से खारिज भी हो चुकी है। परंतु मोरवा पुलिस पटवारी पर बड़ा दिल दिखा रही है।
गौरतलब है कि चितरंगी तहसील के पूर्व में पदस्थ पटवारी राजेश नामदेव ने कतरिहार पंचायत में पदस्थ के दौरान म.प्र. शासन की जमीन में शासकीय पद का दुरूपयोग कर कई एकड़ भूमि का फर्जी प्रविष्टि कर हेराफेरी एवं कूटरचना किया था। जिसके खिलाफ वर्ष 2015 में मोरवा थाना में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था। यह कूटरचना शासकीय आराजी खसरा क्रमांक 356 में हेराफेरी एवं कूटरचना कर खसरा नम्बर 356/4 रकवा 4.670 हे. गोन्ही बेवा बैजनाथ भुर्तिया निवासी कतरिहार के नाम फर्जी तौर पर भूमि स्वामी दर्ज कर दिया गया था। शिकायत होने पर जांच हुई और आरोपी पटवारी राजेश नामदेव के विरूद्ध वर्ष 2015 में मोरवा थाना में भादवि की धारा 419,420, 467, 468 एवं 471 के तहत अपराध पंजीबद्ध हुआ। विवेचना उपरांत उक्त मामले में धारा 13(1) एवं 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 का इजाफा किया गया। आरोपी पटवारी पहले निचली अदालत से जमानत पर था। बाद में उसकी जमानत निरस्त कर दिया गया, तब आरोपी पटवारी ने उच्च न्यायालय जबलपुर का शरण लिया, किंतु पिछले दिनों उच्च न्यायालय जबलपुर के विद्वान जज हिमांसु जोशी के न्यायालय से जमानत याचिका खारिज हो गई। आरोप लगाया जा रहा है कि आरोपी पटवारी पर मोरवा पुलिस मेहरवान है। सुनियोजित तरीके से गिरफ्तार नही किया जा रहा है, ताकि उच्च न्यायालय के डबल बैंच में चला जाए। शिकायतकर्ता ने पुलिस का संरक्षण होने का आरोप लगाते हुये एसपी एवं पुलिस महानिरीक्षक रीवा का ध्यान आकृष्ट कराते हुये आरोपी पटवारी को शीघ्र गिरफ्तार कराए जाने की मांग की है।
