नेशनल हाईवे पर हादसों को आमंत्रण देते आवारा पशु

सतना : जिले में आवारा पशुओं की समस्या अब एक गंभीर मोड़ ले चुकी है. जिले की प्रमुख सड़कों और खासकर नेशनल हाईवे पर रात के समय आवारा मवेशी वाहन चालकों के लिए मुसीबत बनी हुई है आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के बावजूद स्थानीय प्रशासन विकराल होती समस्या को लेकर मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे वाहन चालकों में भारी आक्रोश है.

आधिकारिक आंकड़ों पर नज़र डालें तो जिले में 61 गौशालाओं को स्वीकृति दी गई थी, जिनमें से 55 गौशालाओं का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है. वर्तमान में इनमें से 49 गौशालायें संचालित भी हैं, जिनमें कुल 5540 गौवंश को रखने का दावा किया जा रहा है.

लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि लाखो रुपये खर्च कर बनाई गई इन गौशालाओं के बावजूद हजारों की संख्या में मवेशी सड़कों पर क्यों घूम रहे हैं? हाईवे पर बैठ रहे इन मवेशियों को देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं

सबसे बदतर हालात नेशनल हाईवे के हैं रात के समय अंधेरे में काले और भूरे रंग के मवेशी सड़क के बीचों-बीच बैठे या खड़े रहते हैं, जो तेज रफ्तार वाहनों की लाइट में भी आसानी से दिखाई नहीं देते जब तक वाहन चालक को मवेशी नजर आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा आवारा पशुओं को हाईवे से हटाने के लिए कोई ठोस मुहिम नहीं चलाई जा रही है. हाईवे पर आवारा घूम रहे पशु न सिर्फ खुद दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए भी काल बन रहे हैं.
यदि समय रहते बंद पड़ी 6 गौशालाओं को शुरू नहीं किया गया और सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को रेस्क्यू कर संचालित 49 गौशालाओं में नहीं भेजा गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है

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