माफियाओं का फर्जीवाड़ा

जबलपुर: पाटन थाना अंतर्गत गाढ़ाघाट में खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी में रेत माफियाओं का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। रेत माफियाओं ने शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाकर फर्जी रसीद (बिल बुक) के जरिए अवैध रेत का परिवहन वैध दिखाने का खेल रच रहा था। गुलाबी रसीद कट्टे से अवैध रेत का पूरा खेल चल रहा था ।
जानकारी के अनुसार खनिज निरीक्षक विवेकानंद यादव के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने पाटन-दमोह मार्ग पर स्थित गाढ़ाघाट टोल नाके के पास एक ढाबे के सामने घेराबंदी की थी। इस दौरान टीम ने गोविंद धुर्वे 27 वर्ष, निवासी दमोह को दबोचा था। तलाशी लेने पर आरोपी के पास से एक गुलाबी रंग की फर्जी बिल बुक (रसीद कट्टा क्रमांक 1242) बरामद हुई। इस रसीद बुक में वाहन का नाम, खदान का नाम, रॉयल्टी की राशि और समय जैसी प्रविष्टियां दर्ज थीं, ताकि खनिज विभाग की चेकिंग से बचा जा सके।
8,000 की सैलरी पर रखा था गुर्गा, काटता था फर्जी पर्चियां,
पकड़े गए आरोपी गोविंद धुर्वे ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वर्तमान में जबलपुर जिले में रेत खदानों के टेंडर न होने के कारण आधिकारिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट पास जारी नहीं हो रहे हैं। इसी का फायदा उठाकर पाटन निवासी शिवदास चढ़ार ने पाटन स्टेडियम के पास एक फर्जी ऑफिस खोल रखा था। शिवदास ने गोविंद को 8,000 प्रति माह के वेतन पर गाढ़ाघाट नाके पर तैनात किया था, जिसका काम अवैध रेत लेकर निकलने वाले डंपरों और ट्रकों को ये फर्जी पर्चियां काटना था।
सिंडिकेट में कौन-कौन शामिल, पड़ताल शुरू
आरोपी अवैध आर्थिक लाभ कमाने और शासन को भारी वित्तीय क्षति पहुंचाने की नीयत से यह गोरखधंधा चला रहे थे। पुलिस ने आरोपी गोविंद धुर्वे और शिवदास चढ़ार के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की तस्दीक कर रही है कि इस फर्जी रसीद कट्टे के जरिए अब तक कितने डंपर रेत निकाली जा चुकी है और इस सिंडिकेट में पाटन के और कौन से रसूखदार रेत माफिया शामिल हैं।

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