कोलकाता, 11 जुलाई (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नगरपालिका भर्ती घोटाले में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजित बोस के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया है।
बोस पर आरोप है कि उन्होंने नगरपालिका भर्ती घोटाले से मिली अवैध राशि को अपने चाइनीज रेस्तरां और बार सहित अन्य हॉस्पिटैलिटी व्यवसाय में लगाया।
ईडी के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने शनिवार को बोस , उनके बेटे समुद्र बोस, स्थानीय निकाय के पूर्व निदेशक एवं आईएएस अधिकारी ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय तथा अन्य के खिलाफ नौ जुलाई को कोलकाता की विशेष अदालत में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पूरक अभियोजन शिकायत दर्ज करायी है।
इससे पहले बोस को पीएमएलए मामले में 11 मई को गिरफ्तार किया गया था और विशेष अदालत ने उन्हें 10 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा था। वह अब न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद सीबीआई की दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। एजेंसी ने सौमेन नंदी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य व अन्य के मामले में उच्च न्यायालय के समक्ष एक स्टेट्स रिपोर्ट भी सौंपी थी, जिसमें राज्य भर की विभिन्न नगरपालिकाओं में भर्ती में हुई अनियमितताओं के निष्कर्ष दिये गये थे।
ईडी ने कहा कि उसकी जांच से पता चला है कि दक्षिण दमदम नगरपालिका के तत्कालीन उपाध्यक्ष सुजित बोस ने अवैध नियुक्तियों के लिए 340 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी, जिनमें से 284 को नौकरियां मिलीं थी। नगरपालिका की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार, 2014 से 2022 के बीच 343 उम्मीदवारों की भर्ती की गयी थी। जांच में खुलासा हुआ कि अयोग्य उम्मीदवारों से मिली अपराध की कमाई को शुरुआत में सुजित बोस की प्रोपराइटरशिप फर्म ‘चाइनीज क्विज़ीन रेस्तरां’ के जरिये वैध नकद बिक्री दिखाकर इसे घुमाया गया, जबकि रेस्तरां का काम सीमित ही था। ईडी ने आरोप लगाया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी रेस्तरां के बैंक खातों में बड़ी नकद राशि जमा की गयी थी।
एजेंसी के अनुसार, रेस्तरां से हस्तांतरित पैसों का इस्तेमाल बाद में पूंजी निवेश और बिना गारंटी वाले कर्ज के जरिये ‘मेसर्स श्री वेंकटेश बैंक्वेट्स प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘मेसर्स स्पेशलिटी ढाबा एलएलपी’ (बंगाल ढाबा एंड द बार एंड लाउंज) सहित हॉस्पिटैलिटी व्यवसायों को बढ़ाने में किया गया। संपत्ति खरीदने के लिए अतिरिक्त रकम कथित तौर पर फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों से उधार लेकर जुटायी गयी, जिसे बाद में हॉस्पिटैलिटी इकाइयों की फर्जी व बढ़ा-चढ़ाकर दिखायी गयी नकद बिक्री के माध्यम से अपराध की कमाई से चुकाया गया।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि सुजित बोस को नौकरियां दिलवाने के बदले में कई फ्लैट मिले, जिससे उन्हें अपराध की कमाई से सीधा फायदा हुआ। एजेंसी ने यह दावा भी किया कि उन्होंने करोड़ों रुपये नकद हासिल किये, जिन्हें बाद में अपने कारोबारी उपक्रमों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया। ईडी का आरोप है कि बोस ने न केवल दक्षिण दमदम नगरपालिका में भर्ती प्रक्रिया से समझौता किया, बल्कि मौद्रिक लाभ के बदले अवैध नियुक्तियां कर निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती के अधिकार का भी हनन किया।
ईडी जांच में यह भी सामने आया कि आईएएस ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल सरकार के स्थानीय निकाय निदेशालय निदेशक के रूप में काम करते हुए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने तय भर्ती प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए विभिन्न नगरपालिकाओं, विशेष रूप से दक्षिण दमदम नगरपालिका में अवैध नियुक्तियों को आसान बनाया, वैध ठहराया और नियमित किया।
ईडी के अनुसार, ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय ने मौजूदा सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत जरूरी दस्तावेजों के न होने के बावजूद दक्षिण दमदम नगरपालिका में 29 अतिरिक्त नियुक्तियों के प्रस्ताव को ‘विशेष मामले’ के रूप में मंजूरी दी थी।
ईडी ने इससे पहले 24 फरवरी को कोलकाता की विशेष अदालत में अयन शील के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज करायी थी।
