रसायनों में कटौती कर कृष्णा कंपनी दे रही दूषित पानी

सतना: शहर में पिछले एक सप्ताह से पीने के पानी की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है.पूरे शहर में नलों के माध्यम से गंदे और दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस शुद्धिकरण और जलापूर्ति का जिम्मा गुजरात की कृष्णा कंपनी को करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ सौंपा गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कंपनी पानी को साफ़ करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो चुकी है.

हालांकि, महज़ एक हफ्ते के भीतर ही कंपनी के दावों की पोल खुल गई है। घरों के नलों से आ रहा मटमैला और बदबूदार पानी साफ गवाही दे रहा है कि वॉटर फिल्टरेशन प्लांट सिर्फ कागजों पर चल रहा है.विभागीय जानकारों और विशेषज्ञों के अनुसार, वॉटर फिल्टर प्लांट में पानी को पूरी तरह शुद्ध और पीने योग्य बनाने के लिए कच्चे पानी की नियमित रूप से लैब टेस्टिंग की जानी अनिवार्य है, ताकि पानी में मौजूद गंदगी के आधार पर रसायनों का सही और सटीक अनुपात तय किया जा सके.पानी को साफ़ करने के लिए एलम (फिटकरी), क्लोरीन, O_2 (ऑक्सीजन) और ब्लीचिंग पाउडर सहित कई रसायनों को मिश्रित किया जाता है। लेकिन करोड़ों का ठेका होने के बावजूद, मुनाफे के चक्कर में इन रसायनों की मात्रा को काफी कम कर दिया गया है, जिसके कारण पूरे शहर में प्रदूषित और जहरीला पानी सप्लाई हो रहा है

मामले में सबसे बड़ा घालमेल रसायनों की खरीदी और उसके उपयोग को लेकर सामने आया है.

आंकड़ों के मुताबिक कृष्णा कंपनी ने पिछले 9 महीनों के भीतर लगभग 100 टन एलम की कुल खरीदी की है, कृष्णा कंपनी ने जिस कंपनी से एलम खरीदा उससे नवभारत ने संपर्क किया जिसके बाद एलम में काफ़ी अलग अलग आँकड़े सामने आए हैं. जबकि कंपनी के स्थानीय देख रेख कर रहे अमित कामरानी का दावा है कि वे एक महीने में ही 60 टन तक रसायन का उपयोग कर चुके हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, वॉटर प्लांट में प्रतिदिन कई टन एलम (फिटकरी) का उपयोग होना अनिवार्य है. ऐसे में यह बात गले नहीं उतरती कि मात्र 100 टन की कुल खरीदी करने वाली कंपनी इतने महीनों से पानी को कैसे फिल्टर कर रही थी. इतने कम रसायनों के साथ पानी को शुद्ध करना मुमकिन ही नहीं है, जो सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. इस गंभीर लापरवाही के बाद अब स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की भूमिका पर भी उंगलियां उठने लगी हैं कि इतने बड़े प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग आखिर क्यों नहीं की जा रही है.

इस पूरे मामले को लेकर अब राजनीति भी गरमा गई है.विपक्ष ने सत्तापक्ष और प्रशासनिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं.विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब कंपनी के पास रसायनों का पर्याप्त स्टॉक ही नहीं था, तो उसे इतने बड़े प्रोजेक्ट का भुगतान और क्लीन चिट कैसे दी जा रही थी? इस पूरे टेंडर और कंपनी की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.

इनका कहना
इस समय ज़्यादा एलम का उपयोग कर रहे हैं क़रीब एक महीने में 60 टन और एक सप्ताह में 8 टन एलम उपयोग किया गया

अमित कामरानी
कृष्णा कंपनी

इनका कहना
60 लाख लीटर पानी में प्रतिदिन 1.8 टन एलम डाला जा रहा है फ़िल्टर प्लांट में कुछ गड़बड़ी है जल्द सुधार हो जाएगा

राहुल पटेल
जल प्रदाय प्रभारी अधिकारी

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