इंदौर: निगम नामांतरण घोटाले में एक और खुलासा हुआ है. रात को तीन घंटे में किए नामान्तरण में से सौ से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्री करा ली है. इसकी जानकारी निगम अधिकारियों को लगी तो उन्होंने शेष नामांतरण पर रोक लगाने और सौ से ज्यादा रजिस्टि्रयों की रजिस्ट्रार कार्यालय से सूची मांगी है. अब नगर निगम रजिस्टि्रयों के जरिए नामांतरण घोटाले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है.
शहर में घोटालों का अड्डा बने नगर निगम के नामांतरण घोटाले में नया खुलासा हुआ है. एक रात में करीब 10.30 से 3 बजे के बीच 360 से ज्यादा संपत्तियों का नामांतरण कर दिया गया था. उपरोक्त 360 संपत्तियों में से नामांतरण के आधार पर सौ से ज्यादा संपत्तियों की लोगों ने रजिस्ट्री करा ली है. ध्यान रहे कि पिछले दिनों इस बात का खुलासा हुआ था कि निगम में जनवरी से मार्च के बीच 370 संपत्ति कर खातों के नाम बदल दिए गए. सभी नाम रात 10 से लेकर सुबह 3 के दरमियान बदले गए. बताया जा रहा है कि उक्त 370 संपत्ति कर खातों के नाम बदलने में दो उपायुक्त, चार सहायक राजस्व अधिकारी और आउट सोर्स कंपनी का कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल होने की संभावना बताई गई थी. उक्त घोटाले को लेकर मैक आईडी और आईपी एड्रेस मांगा गया है, लेकिन निगम का आईटी विभाग दोनों को अभी तक पकड़ नहीं पाया है. इस बात से निगम आयुक्त, अपर आयुक्त राजस्व , उपायुक्त और सभी आश्चर्यचकित है कि आईटी विभाग जिस मैक आईडी और आईपी एड्रेस से नाम बदले गए है, उनको पकड़ नहीं पा रहा है.
इसी बीच निगम राजस्व आयुक्त को नामांतरण के आधार पर सौ संपत्तियों की रजिस्ट्री होने जानकारी मिली है. नगर निगम ने रजिस्ट्रार कार्यालय से सौ से ज्यादा रजिस्टि्रयों की सूची मांगी है. साथ ही बचे 270 नामांतरण की रजिस्ट्री पर रोक लगाने का भी कहा है.
रजिस्टि्रयों की सूची मांगी
अपर आयुक्त आकाशसिंह ने खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि रजिस्टि्रयों की सूची मांगी है, ताकि जांचकर पता लगाया जा सके कि नामांतरण हुए कैसे और किसके कहने पर किया है. सिंह ने बाकी प्रकरणों में रजिस्ट्री करने पर रोक लगाने का आदेश दिया है.
