इंदौर: राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2022 में जारी गजट नोटिफिकेशन से नगर निगम को 3 सौ करोड़ की आय होने की संभावना है। इसके तहत अब नगर निगम सीमा में निर्मित बहुमंजिला इमारतों को निगम कॉलोनी सेल में आश्रय निधि जमा करके एनओसी लेना अनिवार्य है. निगम को आश्रय निधि का भुगतान गाइड लाइन की वर्तमान दर से 6 प्रतिशत राशि चुकाना होगी. शहर में पिछले चार साल में बनी बहुमंजिला इमारत के रहवासियों ओर बिल्डरों को राशि देना पड़ेगी. बताया जा रहा है कि बहुमंजिला इमारत को भी सरकार ने कॉलोनाइजेशन का हिस्सा माना है.
नगर निगम भवन अनुज्ञा शाखा ने निगम सीमा में आश्रय निधि जमा करने के नोटिस जारी कर दिए है. वहीं हाईकोर्ट में केविएट भी लगा दी है, जिससे बिल्डर कोर्ट से आश्रय निधि राशि को लेकर स्थगन नहीं ले सके. दरअसल 2 जुलाई को नव भारत ने छोटा बांगड़दा स्थित खसरा न.363/4 एवं 363/5 की 0599 हेक्टेयर पर निर्मित बहुमंजिला को लेकर नगर निगम की कॉलोनी सेल आश्रय निधि के मामले का खुलासा किया था.
निगम भवन अनुज्ञा शाखा ने उक्त खसरे पर निर्माणाधीन इमारत को लेकर सार्थक कंस्ट्रक्शन के अभिषेक अग्रवाल को कॉलोनी सेल से एनओसी के लिए नोटिस दिया था, जिसमें उनके तर्को को अमान्य करते हुए आश्रय निधि की राशि जमा करने पर ही नक्शा संशोधन की अनुमति देने का उल्लेख है. इसके बाद निगम भवन अनुज्ञा शाखा ने निगम सीमा में जनवरी 2022 के बाद स्वीकृत नक्शों के आधार पर सभी बहुमंजिला इमारतों को नोटिस जारी कर कॉलोनी सेल की आश्रय निधि जमा करने के निर्देश दिए हैं. बताया जा रहा है कि एक अनुमान के अनुसार शहर में 450 से 500 सौ बहुमंजिला इमारत का काम चल रहा है. इसके तहत नगर निगम को वर्तमान गाइड लाइन से 6 प्रतिशत राशि का भुगतान करना है. कॉलोनी सेल सूत्रों के अनुसार आश्रय निधि से निगम को 250 से 300 सौ करोड़ रुपए मिलने की संभावना है.
इस बारे में भवन अनुज्ञा शाखा के प्रभारी सत्येंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि आश्रय निधि के लिए 230 से ज्यादा नोटिस जारी कर दिए हैं. आश्रय निधि जमा कर कॉलोनी सेल से एनओसी लेने के बाद ही आगे निर्माण किया जा सकेगा. साथ ही कॉलोनी सेल आश्रय निधि जमा नहीं करने पर भवन सील करने की कार्रवाई होगी।
यह है नियम….
राज्य शासन के निम्न नियमों के तहत निगम को आश्रय निधि का करना होगा भुगतान. राज्य शासन ने नगर पालिका अधिनियम 1956 के तहत कॉलिनी विकास नियम 2021 के प्रचलित नियमों के तहत भूमि/ भूखंडों पर विकास अनुमति/ एनओसी के लिए कॉलोनी सेल विभाग को आश्रय निधि देने का उल्लेख है.
निगम की आश्रय निधि को लेकर कार्रवाई
नगर निगम भवन अनुज्ञा शाखा के अपर आयुक्त ने सभी बहुमंजिला इमारतों के निर्माताओं को निगम कॉलोनी सेल में आश्रय निधि जमा कर एनओसी /अनुमति लेने का लिए कहा है. सूचना में स्पष्ट उल्लेख है कि हाईकोर्ट में केविएट दायर की जा चुकी है। निगम का पक्ष सुने बगैर कोर्ट किसी तरह का निर्णय नहीं करेगी.
राज्य शासन ने जनवरी 2022 में किया एनओसी लेना अनिवार्य
राज्य शासन ने 13 जनवरी 2022 को ही पूरे प्रदेश में गैर आवासीय, व्यवसायिक और बहु प्रकोष्ठीय भवनों पर कॉलोनी सेल विभाग में विकास शुल्क और आश्रय निधि की राशि जमा करके एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया है. साथ ही सभी नगर निगम को उक्त आदेश और गजट नोटिफिकेशन की जानकारी भेज कर विकास शुल्क और आश्रय निधि की राशि वसूलने के आदेश जारी किए हैं.
आश्रय निधि की गणना का उदाहरण
शहर में उदाहरण के लिए 20 हजार वर्गफुट पर छह मंजिला भवन ओर उसमें निर्मित 60 प्रकोष्ठों बने हैं. हर मंजिल पर दो या तीन बेड रूम के 10 फ्लैट है, तो उनका कुल वर्गफुट जोड़कर, जितना निर्माण होगा, उसका वर्तमान गाइड लाइन से 6 प्रतिशत भुगतान बिल्डर को करना होगा. 60 फ्लैट मतलब 60 परिवार. 60 परिवार कॉलोनी सेल के कॉलोनाइजेशन की श्रेणी माना जाएगा. इस हिसाब से एक बहुमंजिला इमारत में जमीन सहित 1 लाख से ज्यादा वर्गफुट विकास हुआ. उदाहरण के तौर पर किसी क्षेत्र की गाइड लाइन 5 हजार रुपए वर्गफुट है, तो एक लाख वर्ग फुट का 50 करोड़ रुपए बनते हैं. 50 करोड़ का 6 त्न करीब 3 करोड़ रुपए आश्रय निधि होगी
