
आलीराजपुर । जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय में करोड़ों रुपये के निर्माण, टेंडर, भुगतान और तकनीकी स्वीकृतियों से जुड़े महत्वपूर्ण शासकीय अभिलेख खुले खंडहर में बिखरे मिलने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद ने इस लापरवाही को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है।
परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल (रावत) ने आरोप लगाया कि विभाग के संवेदनशील रिकॉर्ड सुरक्षित रिकॉर्ड रूम में रखने के बजाय खुले में फेंके हुए थे। मीडिया के पहुंचते ही अधिकारियों-कर्मचारियों ने दस्तावेजों को आनन-फानन में समेटने की कोशिश की, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
मामला क्या है
* *जगह*: जिला आलीराजपुर, जनजातीय कार्य विभाग कार्यालय
* *क्या मिला*: निर्माण कार्यों, तकनीकी स्वीकृतियों, टेंडरों, भुगतान आदेशों से जुड़े करोड़ों के दस्तावेज
* *आरोप*: रिकॉर्ड सुरक्षा में गंभीर लापरवाही, छेड़छाड़ और दस्तावेज गायब या नष्ट करने की आशंका
* *मांग*: स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और रिकॉर्ड की सुरक्षा
मुख्यमंत्री से परिषद की 6 प्रमुख मांगें
1. *SIT या उच्चस्तरीय समिति से जांच*: पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए
2. *फिजिकल वेरिफिकेशन*: कार्यालय के सभी अभिलेखों का तत्काल भौतिक सत्यापन हो
3. *रिकॉर्ड पर रोक*: जांच पूरी होने तक किसी भी दस्तावेज को हटाने, नष्ट करने या छेड़छाड़ पर प्रतिबंध लगे
4. *जवाबदेही तय हो*: सहायक आयुक्त, रिकॉर्ड शाखा प्रभारी और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो
5. *आपराधिक कार्रवाई*: यदि छेड़छाड़ या दस्तावेज नष्ट होने की पुष्टि हो तो BNS, BNSS और अन्य कानूनों के तहत FIR दर्ज हो
6. *रिपोर्ट सार्वजनिक हो*: जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी जनता के सामने लाई जाए
