खनिज तेल-गैस स्रोतों के दोहन से बनेगा ‘विकसित भारत’: अनिल अग्रवाल

नयी दिल्ली, 10 जुलाई (वार्ता) वेदांता समूह ने घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि कंपनी दैनिक पांच लाख बैरल खनिज तेल या उसके समतुल्य गैस के उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का कहना है कि भारत अपने यहां उपलब्ध 300 अरब बैरल तेल/ गैस का जिम्मेदारीपूर्वक दोहन कर आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम कर सकता है।

वैश्विक ऊर्जा स्वाधीनता दिवस अवसर के उपलक्ष्य में एक बयान में खनन क्षेत्र के दिग्गज वेदांता समूह ने कहा है कि दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए उद्योग, उद्यमियों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक होगी। वेदांता का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्ण दोहन न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार सृजन, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजारों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद देश अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए लगभग 90 प्रतिशत आयात पर निर्भर है तथा वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता रहता है। कंपनी का मानना है कि घरेलू स्तर पर तेल एवं गैस की खोज और उत्पादन को तेज़ कर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा, “ ऊर्जा आत्मनिर्भरता भारत के लिए एक रणनीतिक आर्थिक आवश्यकता है। देश के भीतर उत्पादित तेल और गैस का प्रत्येक बैरल हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, आयात पर निर्भरता कम करता है और राष्ट्र की ताकत बढ़ाता है। भारत के पास प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, विश्वस्तरीय तकनीकी प्रतिभा और उद्यमशीलता की क्षमता है। दुनिया के लगभग 10 प्रतिशत तेल और गैस पेशेवर भारतीय हैं और यह प्रतिभा, हमारे विशाल संसाधन आधार के साथ मिलकर, भारत के ऊर्जा भविष्य को बदलने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। यदि हम अपने हाइड्रोकार्बन संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक दोहन करें, तो ऊर्जा आत्मनिर्भरता आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और विकसित भारत की दिशा में एक शक्तिशाली प्रेरक शक्ति बन सकती है।”

कंपनी ने कहा कि भारत में अब भी कई संभावित बेसिनों की व्यवस्थित खोज नहीं हुई है, जिससे घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। वेदांता ऑयल एंड गैस का कहना है कि वह उन्नत तकनीकों और बेहतर ऑयल रिकवरी के जरिए इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की दिशा में काम कर रही है।कंपनी ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों (डीप और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक्स) को खोज के लिए खोलने जैसे कदम उठाए हैं। यह पहल प्रधानमंत्री के नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन ‘समुद्र मंथन’ के विजन के अनुरूप है। वेदांता का मानना है कि इस दशक के अंत तक भारत के ऊर्जा क्षेत्र में करीब 500 अरब डॉलर के निवेश की संभावनाएं हैं।

वेदांता ऑयल एंड गैस के पास वर्तमान में राजस्थान, गुजरात, असम और आंध्र प्रदेश में लगभग 47,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 44 ऑनशोर और ऑफशोर ब्लॉक्स का पोर्टफोलियो है। कंपनी का कहना है कि वह जिम्मेदार संचालन, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्ध है तथा भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए लगातार निवेश कर रही है।

 

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