
भोपाल। सीहोर जिले के सैकड़ों किसानों ने बुधवार को करंट हादसे में गंभीर रूप से घायल किसान सतीश मेवाड़ा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर राजधानी भोपाल में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निवास पर प्रदर्शन किया। किसान एवं समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने ऊर्जा मंत्री, जिला प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर तथा विद्युत विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए पीड़ित किसान के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की।
किसानों का आरोप है कि 18 जून 2026 को सीहोर जिले के ग्राम बड़वेली निवासी किसान सतीश मेवाड़ा खेत में काम कर रहे थे, तभी खेत के ऊपर से गुजर रही झूलती 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आने से वे गंभीर रूप से झुलस गए। ग्रामीणों का कहना है कि लाइन की जर्जर स्थिति की शिकायत पहले भी कई बार विद्युत विभाग से की गई थी, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि हादसे के 17 दिन बाद भी सतीश मेवाड़ा भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। इलाज के दौरान उनका एक हाथ काटना पड़ा है, जबकि एक पैर भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है। किसानों का कहना है कि वे पहले सीहोर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और विद्युत विभाग के अधिकारियों को भी ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें भोपाल आकर आंदोलन करना पड़ा।
किसानों के प्रदर्शन के दौरान ऊर्जा मंत्री कैबिनेट बैठक से लौटकर अपने निवास पहुंचे और ज्ञापन स्वीकार किया। उन्होंने मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के प्रबंध संचालक से दूरभाष पर चर्चा कर पीड़ित किसान को तत्काल राहत, उचित मुआवजा और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री निवास से भी मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी दी गई। वहीं, प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने भी विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए लिखित निर्देश जारी किए।
ज्ञापन में किसानों ने प्रदेशभर में झूलती और जर्जर विद्युत लाइनों की तत्काल मरम्मत कराने की भी मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन में बड़वेली, बिलकिसगंज, रामखेड़ी, अमरूद, अवंतीपुरा, चंदेरी, मगरखेड़ा, मोरिया, भगवानपुर, डाबला सहित दर्जनों गांवों के किसान शामिल हुए।
