न्यायालय के आदेशों की अवेलहना बर्दाश्त नहीं: हाईकोर्ट

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने न्यायालय के आदेशों को हल्के में लेने वाले अधिकारियों को सख्त संदेश दिया है कि कोर्ट के निर्देश केवल कागजों के लिए नहीं होते। समय-सीमा तय नहीं होने से अवमानना की कार्रवाई तो फिलहाल टल गई, लेकिन कोर्ट ने 90 दिन की अंतिम मोहलत देते हुए ब्याज सहित मूल आदेश का पालन हर हाल में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा ने पक्ष रखा। कोर्ट ने नरसिंहपुर जिले के करेली निवासी सेवानिवृत्त उच्च श्रेणी शिक्षक रामदर्शन शर्मा की अवमानना याचिका का निराकरण करते हुए उक्त आदेश पारित किया। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने 25 फरवरी 2026 को पारित आदेश में नियमित वेतनमान के एरियर पर आठ प्रतिशत बैंक दर से ब्याज देने का निर्देश दिया था, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने अब तक आदेश का पालन नहीं किया। इसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि मूल आदेश में पालन के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं थी। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में अवमानना का मामला नहीं बनता। हालांकि न्यायहित को देखते हुए न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को 25 फरवरी 2026 के आदेश का 90 दिन के भीतर पालन करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इन टिप्पणियों के साथ अवमानना याचिका का निराकरण कर दिया गया।

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