शिमला/चंडीगढ़ | हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले मतदान से पहले कांग्रेस खेमे में भारी बेचैनी देखी जा रही है। खरीद-फरोख्त और क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित कुफरी भेज दिया है। शुक्रवार देर शाम पुलिस सुरक्षा के साये में विधायकों का काफिला होटल ‘ट्विन टावर’ पहुँचा, जहाँ उन्हें लोकतंत्र की ‘कड़ी निगरानी’ में रखा गया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी बाहरी संपर्क से बचाने के लिए यह ‘राजनीतिक पर्यटन’ बेहद जरूरी हो गया था।
कुफरी के होटल ट्विन टावर को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश पुलिस की भारी तैनाती के साथ होटल के अंदर और बाहर अवांछित गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में जीत के लिए प्रति उम्मीदवार 31 वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जो गणितीय रूप से जीत के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, भाजपा के 48 विधायकों के समर्थन और निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय और दिलचस्प बना दिया है, जिससे कांग्रेस अपने एक भी वोट को लेकर रिस्क नहीं लेना चाहती।
इस बार कांग्रेस ने दलित नेता कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारकर बड़ा दांव खेला है, वहीं भाजपा की ओर से संजय भाटिया चुनौती दे रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी की एंट्री ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि गुप्त मतदान के दौरान विधायक ‘रास्ता भटक’ सकते हैं। यह चुनाव अब केवल आंकड़ों का खेल न रहकर कांग्रेस के लिए अपनी सांगठनिक एकता साबित करने की साख की लड़ाई बन गया है। अब सभी की नजरें 16 मार्च की वोटिंग पर टिकी हैं कि क्या शिमला की इन बर्फीली वादियों में हुई बाड़ेबंदी पार्टी के उम्मीदवार की चुनावी नैया पार लगा पाएगी।

