
शाजापुर, जिस जमीन को शाजापुर कलेक्टर ने सरकारी घोषित किया, उसके बाद शाजापुर में वक्फ के कुछ तथाकथित सदस्यों ने फर्जी तरीके से उक्त सरकारी जमीन को वक्फ में शामिल कर लिया और भोपाल वक्फ बोर्ड ने बकायदा उसे वक्फ की जमीन बता दिया, लेकिन यह मामला हाईकोर्ट में था, जिस पर हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश हटाकर उक्त जमीन को सरकारी बताया.
गौरतलब है कि शाजापुर नईसडक़ स्थित भूतेश्वर मंदिर के पास दरगाह गेबशाह वली मनिहारवाड़ी की जो जमीन वक्फ की बताई जा रही है, वो सरकारी थी, जिसे कलेक्टर ने अप्रैल 2024 में सरकारी घोषित किया था, लेकिन शाजापुर में जो वक्फ बोर्ड के सदस्य हैं, उन्होंने कलेक्टर के आदेश के बाद भी अगस्त 2024 को भोपाल वक्फ बोर्ड में उक्त दरगाह की जमीन को वक्फ की जमीन बता दिया, जिस पर भोपाल वक्फ बोर्ड ने वक्फ की जमीन के आदेश भी जारी कर दिए. यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जिस पर हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश को हटाकर उक्त जमीन प्रशासन को सौंपी.
कौन है वो सदर जिन्होंने वक्फ में फर्जीवाड़ा किया
शाजापुर में वक्फ बोर्ड के जिन सदस्यों ने सरकारी जमीन होने के बाद भी उसे वक्फ में शामिल कराया, उनके खिलाफ फर्जीवाड़े की कार्यवाही होना चाहिए. क्योंकि कलेक्टर द्वारा प्रकरण क्रमांक 001/अ-6/2024-25 आदेश दिनांक 26 अप्रैल 2024 के अनुसार खसरा नंबर 321 इसी प्रकार न्यायालय कलेक्टर प्रकरण क्रमांक 001 आदेश दिनांक 26 अप्रैल 2024 से मप्र शासन किया गया. चालू चबुतरा कच्चा महादेव जी की गुफा रकबा क्रमांक 0.021 है. साथ ही पुलिस सहायता केंद्र हेतु आरक्षित रकबा 0.060 है. लेकिन इस आदेश के बाद वक्फ बोर्ड शाजापुर के सदस्यों ने फर्जी तरीके से 18 अगस्त 2024 को उक्त जमीन दरगाह गेबशाह वली मोहल्ला मनिहारवाड़ी के नाम दर्ज करा दी, जिसे बकायदा वक्फ बोर्ड भोपाल द्वारा आदेशित किया, जिस पर वक्फ बोर्ड चेयरमेन ने अपने दस्तखत से 321/5 रकबा 0.21 हेक्टेयर को इंद्राज किया गया है.
सदस्यों के फर्जीवाड़े पर होगी कार्यवाही…
शाजापुर वक्फ में जो वर्तमान में सदस्य हैं, उन्होंने कूटरचना कर सर्वे नंबर 321 को जो सरकारी है, उसे 321/5 बताकर वक्फ में शामिल कराया. इस फर्जीवाड़े को लेकर क्या जिले के वक्फ सदस्यों के खिलाफ प्रशासन कोई कार्यवाही करेगा. क्योंकि जो जमीन पहले से ही सरकारी घोषित थी, उसके बाद उसे वक्फ में शामिल किया गया, जो एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है.
सनवर पटेल को भाजपा ने बनाया अध्यक्ष
मप्र वक्फ बोर्ड के चेयरमेन सनवर पटेल, जिन्हें हाल ही में सरकार ने दोबारा चेयरमेन मनोनीत किया है, लेकिन उनके ही हस्ताक्षर से सरकारी जमीन को वक्फ में शामिल करने का आदेश चर्चा का विषय है. इस संबंध में नवभारत ने जब सनवर पटेल को फोन पर इस संबंध में जानकारी चाही, तो उन्होंने कागज देखने के बाद आगे की बात करने की बात कही. सवाल यह उठता है कि ऐसे मप्र में कितने जिले होंगे, जहां सरकारी जमीन होने के बाद भी उन्हें वक्फ में शामिल किया जा रहा है. यह एक जांच का विषय है.
इनका कहना है
कागज देखने के बाद ही इस विषय पर कुछ कहा जा सकता है. – सनवर पटेल, चेयरमेन, मप्र वक्फ बोर्ड, भोपाल
