
सौसर, क्षेत्र के ग्राम बिछुआ बग्गु में स्थित लोक निर्माण विभाग की पुलिया लंबे समय से अत्यंत जर्जर और बदहाल स्थिति में है। विडंबना यह है कि जिम्मेदार प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर पूरी तरह आंखें बंद कर बैठा है। इस जर्जर पुलिया से प्रतिदिन करीब 5 से 6 स्कूली बसों सहित सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं, जिससे स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर हर वक्त खतरे की तलवार लटकी रहती है।
*बरसात में बढ़ी मुश्किलें, गड्ढों में तब्दील हुई पुलिया*
पुलिया की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि इस पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। वर्तमान में जारी मानसूनी बारिश के कारण स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो गई है। जलभराव के चलते गड्ढों का अंदाजा नहीं मिल पाता, जिससे यहाँ कभी भी कोई बड़ा और दर्दनाक हादसा घटित हो सकता है।
*किसान और वाहन चालक बेहद परेशान*
यह सीजन खेती-किसानी का है, ऐसे में स्थानीय किसानों को अपने खेतों के लिए खाद, बीज और अन्य जरूरी कृषि सामग्री लाने-ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खराब पुलिया के कारण वाहन चालकों को गाड़ियों के पलटने या दुर्घटनाग्रस्त होने का लगातार डर सताता रहता है।
*चुनाव बीतते ही वादे भूले जनप्रतिनिधि*
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे और वादे करने वाले जनप्रतिनिधि आज इस बेहद महत्वपूर्ण और जमीनी समस्या की ओर मुड़कर भी नहीं देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस पुलिया की सुध नहीं ली, तो किसी दिन इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
*ग्रामीणों ने की तत्काल मरम्मत की मांग*
ग्रामीणों, जागरूक नागरिकों और पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी विभाग एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि ग्राम बिछुआ बग्गु की इस जर्जर पुलिया की तत्काल प्रभाव से मरम्मत या नवनिर्माण कराया जाए, ताकि किसी भी संभावित अनहोनी को टाला जा सके और स्कूली बच्चों सहित आम जनता को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। इधर सरपंच प्रमोद पातुरकर ने नवभारत से चर्चा में बताया कि पुलिया के उन्नयन के बारे कई बार विभाग के अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया गया लेकिन आज तक परिणाम शून्य है। बहरहाल ग्रामीण सुचारु आवागमन को लेकर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
