सिंगरौली: परसदेही में पावर ग्रिड टावर निर्माण विवाद को लेकर दर्ज एफआईआर के बाद नगर पालिका निगम सिंगरौली की पूर्व महापौर रेनू शाह ने अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करना अपराध नहीं हो सकता। यदि न्याय की बात करने पर एफआईआर दर्ज होती है तो पावर ग्रिड कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों, कार्य करा रहे ठेकेदार और संबंधित राजस्व अधिकारियों की कथित लापरवाही की भी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए।
रेनू शाह ने दावा किया कि मृतक के परिजनों और मौके पर मौजूद अधिकारियों के बीच जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई ठोस कदम सामने नहीं आया। उनका कहना है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई होती तो जनता का पुलिस और प्रशासन पर भरोसा और मजबूत होता।
पूर्व महापौर ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं और औद्योगिक हादसों में जान गंवाने वाले कई परिवार आज भी मुआवजा, नौकरी और अन्य सहायता के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ितों की आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई की जाती है, जबकि मूल समस्याओं के समाधान पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।
रेनू शाह ने स्पष्ट किया कि वह घटना स्थल पर नहीं थीं, बल्कि पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उन्हें न्याय दिलाने की बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद या शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करना नहीं था, बल्कि समाज और प्रशासन को अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील बनाना था। उन्होंने विश्वास जताया कि सिंगरौली की जनता लगातार जागरूक हो रही है और भविष्य में अपने अधिकारों एवं न्याय की लड़ाई के लिए संगठित होकर आवाज उठाएगी।
