
भोपाल। पृथ्वी सोमवार यानि 6 जुलाई को अपनी वार्षिक कक्षा में सूर्य से सर्वाधिक दूरी वाले बिंदु ‘एफ़ेलियन’ पर पहुंचेगी। नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि भारतीय समयानुसार सोमवार रात 11 बजे पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी वर्ष में सबसे अधिक होगी।
सारिका घारू ने बताया कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने की कक्षा पूरी तरह गोल नहीं, बल्कि अंडाकार है। इसी कारण वर्ष में एक बार पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट तथा एक बार सबसे अधिक दूर होती है। एफ़ेलियन के समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 15 करोड़ 20 लाख किलोमीटर होगी, जबकि तीन जनवरी को पेरिहेलियन के दौरान यह दूरी लगभग 14 करोड़ 70 लाख किलोमीटर थी।
उन्होंने कहा कि आम धारणा है कि सूर्य से दूरी बढ़ने पर तापमान कम होना चाहिए, लेकिन मौसमों का संबंध पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी के लगभग 23.5 डिग्री झुकाव से होता है। वर्तमान में उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका हुआ है, इसलिए भारत सहित इस क्षेत्र में सूर्य की किरणें अपेक्षाकृत सीधी पड़ रही हैं और गर्मी का अनुभव होता है। इसके विपरीत दक्षिणी गोलार्ध में इस समय शीत ऋतु रहती है।
सारिका घारू ने बताया कि एफ़ेलियन के दौरान सूर्य का दृश्य आकार सामान्य की तुलना में लगभग 3.4 प्रतिशत छोटा दिखाई देता है, हालांकि इसे नंगी आंखों से महसूस करना संभव नहीं है।
उन्होंने विद्यार्थियों और आम नागरिकों से इस खगोलीय घटना को विज्ञान को समझने के अवसर के रूप में देखने की अपील करते हुए कहा कि सूर्य को कभी भी सीधे नंगी आंखों अथवा साधारण दूरबीन से नहीं देखना चाहिए।
