चेन्नई, 04 जुलाई (वार्ता) तमिलनाडु के पड़ोसी तिरुवल्लूर जिले में एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात इकाई में 21 जून को हुई गैस रिसाव त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 18 हो गयी है।
वहीं जिला प्रशासन ने सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर परिसर में जमा अमोनिया गैस निकालने की प्रक्रिया शनिवार को शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जहरीली गैस की चपेट में आने वाली इलाजरत एक और महिला ने कल शाम दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 18 हो गयी। सभी मृतक महिलाएं थीं और उनमें से अधिकतर ओडिशा की रहने वाली थीं। मृतकों में असम की दो और झारखंड की एक श्रमिक भी शामिल है।
स्वास्थ्य विभाग ने एक मेडिकल बुलेटिन में कहा है कि इस त्रासदी में 83 कर्मचारी प्रभावित हुए थे। उनमें से 51 को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गयी है, जबकि 14 का इलाज जारी है और वे निरंतर निगरानी में हैं। उनमें से एक वेंटिलेटर और दूसरा ऑक्सीजन सपोर्ट पर है और शेष 12 की हालत स्थिर है।
कुल 14 प्रभावित कर्मचारियों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा था। इनमें से सात का इलाज राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल में, चार का वेल्स अस्पताल में, दो का वेंकटेश्वर अस्पताल (दोनों तिरुवल्लूर में स्थित) में और एक का चेन्नई के सरकारी स्टेनली मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।
तिरुवल्लूर की जिलाधिकारी सुश्री कविता ने संवाददाताओं को बताया कि पिछले दो दिनों की विस्तृत योजना के बाद परिसर में जमा लगभग दो टन अमोनिया गैस निकालने की प्रक्रिया विभिन्न एजेंसियों को शामिल कर आज सुबह शुरू की गयी। परिसर से गैस की पूरी मात्रा हटाने में लगभग दो से तीन दिन लगेंगे। इसके बाद परिसर को सील कर दिया जायेगा।
उन्होंने कहा कि जब गैस हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो एक मामूली रिसाव हुआ था, लेकिन उसे तुरंत ठीक कर दिया गया और चिंता की कोई बात नहीं थी।
सुश्री कविता ने बताया कि निर्यात इकाई के 500 मीटर के दायरे में आने वाले सभी परिसरों की घेराबंदी कर दी गयी है। उस क्षेत्र की सभी दुकानें बंद करा दी गयी है और निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। 500 मीटर के क्षेत्र में यातायात पूरी तरह से रोक दिया गया है और लोगों को फेस मास्क पहनने या गीले कपड़ों से अपनी नाक ढकने की सलाह दी गयी है।
उन्होंने कहा कि गैस निकालने की यह प्रक्रिया स्वास्थ्य, पुलिस, अग्निशमन एवं बचाव सेवाओं और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से चलायी जा रही थी।
गौरतलब है कि इस त्रासदी के तुरंत बाद मुख्यमंत्री विजय ने शोक संतप्त परिवारों को दो-दो लाख रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की थी और घटना की जांच के लिए औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशक, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और सार्वजनिक स्वास्थ्य के अतिरिक्त निदेशक की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, समिति ने भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए अपनी सिफारिशों के साथ तीन दिनों के भीतर राज्य सचिवालय में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी समाचार रिपोर्टों के आधार पर गैस रिसाव त्रासदी का स्वतः संज्ञान लिया है और इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगते हुए तमिलनाडु के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है।
पुलिस ने प्रसंस्करण इकाई के मालिक और मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया है।
