
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने 6.24 लाख रुपये की साइबर ठगी के एक मामले की जांच में धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जबलपुर के पुलिस अधीक्षक, गोराबाजार थाना प्रभारी और विवेचना अधिकारी को अगली सुनवाई पर मूल केस डायरी सहित व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने कहा है कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जबकि उनके संबंध में पर्याप्त जानकारी जांच एजेंसी के पास उपलब्ध है। कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराधों में पीडि़तों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों की जीवनभर की जमा-पूंजी कुछ ही क्षणों में निकल जाती है। ऐसे मामलों की जांच प्रभावी, पेशेवर और समयबद्ध होना न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है। कोर्ट ने जांच एजेंसी से प्रत्येक छापे का विवरण, आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास, अन्य राज्यों की पुलिस से हुए पत्राचार, एकत्रित इलेक्ट्रानिक साक्ष्य तथा जांच पूरी करने की समय-सीमा सहित विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों तथा प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह विभाग को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर यह भी माना कि साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रदेश में ऐसे मामलों की जांच के लिए स्थायी विशेष जांच दल (एसआईटी) अथवा विशेष तंत्र की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।
