तेहरान, 03 जुलाई (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनका मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक समझौते पर चल रही बातचीत में ईरान ‘उनकी लगभग सभी जरूरतों पर सहमत हो गया है।’
श्री ट्रम्प ने सीएनबीसी के साथ एक विस्तृत साक्षात्कार में गुरुवार को बातचीत को लेकर सकारात्मक रुख जताया। यह बातचीत पिछले महीने हुए उस समझौते के बाद हो रही है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच युद्धविराम को बढ़ाया गया, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला गया और ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा व्यापक सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू की गयी।
श्री ट्रम्प ने कहा, “मुझे लगता है कि वे हमारी लगभग सभी जरूरतों पर सहमत हो गये हैं। हम बातचीत कर रहे हैं और आगे देखते हैं क्या होता है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि किन मुद्दों को सुलझा लिया गया है, क्योंकि होर्मुज को लेकर मतभेदों पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत होना अभी बाकी है। युद्ध की शुरुआत में ईरान ने इस बेहद महत्वपूर्ण रास्ते को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गयी थी।
श्री ट्रम्प ने उन आशंकाओं को खारिज कर दिया कि ईरान और युद्ध लंबे समय तक चलने वाले सैन्य टकराव में बदल सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि यह स्थिति पिछले अमेरिकी युद्धों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा, “यह अपने आप में कोई युद्ध नहीं है। यह ईरान का परमाणुकरण रोकने की प्रक्रिया है। आप उन्हें परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दे सकते।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को पश्चिमी एशिया का डराने-धमकाने वाला देश बताया और उसके नेतृत्व की तुलना एक ऐसे ‘बिगड़े हुए बच्चे’ से की, जो दशकों तक बिना किसी बड़े परिणाम के अपनी नीतियां चलाने के बाद अब नयी पाबंदियों के साथ तालमेल बिठा रहा है।
श्री ट्रम्प ने अपने इस दावे को भी दोहराया कि ईरान के नेतृत्व पर किए गए सैन्य हमलों के परिणामस्वरूप वहां एक अधिक व्यावहारिक सरकार सामने आयी है। उन्होंने कहा, “हम (वहां) नेताओं के तीसरे समूह के साथ काम कर रहे हैं और वास्तव में हमारे उनके साथ अच्छे संबंध हैं। मुझे लगता है कि वे बहुत अधिक तर्कसंगत हैं।”
यह सुझाव देते हुए कि इस तरह के बदलाव को सत्ता परिवर्तन का एक रूप माना जा सकता है श्री ट्रम्प ने जोर देकर कहा कि ईरान की सरकार को हटाना अमेरिका का उद्देश्य नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता। मैं एक बहुत ही सरल चीज चाहता हूँ कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।”
श्री ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियानों ने युद्ध के दौरान ईरान की क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा, “उनके पास कोई नौसेना नहीं है, कोई वायुसेना नहीं है, कोई राडार नहीं है, उनके सभी नेता मारे जा चुके हैं। उनकी ताकत चली गयी है, उनका दिखावा खत्म हो गया है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्वीकार किया कि ईरान के पास अभी भी शक्तिशाली मिसाइल क्षमताएं हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर अमेरिका उन्हें बेअसर करने की क्षमता रखता है।
श्री ट्रम्प ने ईरान पर बढ़ते आर्थिक दबाव का भी जिक्र किया और महंगाई तथा ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों के प्रभाव का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “वहां 300 प्रतिशत महंगाई है, वे कोई धन नहीं कमा रहे हैं।”
इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी प्रयासों के बावजूद होर्मुज के माध्यम से समुद्री यातायात को बनाए रखने के लिए अमेरिका द्वारा किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने दावा किया, “हर रात, हम दक्षिण के रास्ते जहाजों को बाहर निकाल रहे थे।”
श्री ट्रम्प ने बार-बार यह दावा किया है कि ईरान परमाणु हथियार की राह छोड़ने के लिए तैयार है और वह अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने की अनुमति देगा। ईरानी अधिकारियों ने हालांकि सार्वजनिक रूप से इन दावों को खारिज किया है।
श्री ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान 2015 में हुए परमाणु समझौते को एक विफलता बताया और कहा कि इसने ईरान को बाद के वर्षों में अपनी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने से नहीं रोका। ओबामा के ईरान से निपटने के तरीके पर उन्होंने कहा, “उन्हें बहुत सारे परमाणु अनुसंधान, बहुत सारे हथियार, बहुत सारी मिसाइलें और एक दुश्मन मिला।”
