
सिंगरौली । म.प्र. उच्च न्यायालय जबलपुर की डिवीजन डबल बेंच ने शास. राजनारायण स्मृति महाविद्यालय बैढ़न के वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर डॉ. एमयू सिद्दीकी के स्थानांतरण मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए उनके तबादले को बरकरार रखा है।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने 30 जून को पारित आदेश में स्पष्ट किया कि स्थानांतरण सेवा का सामान्य हिस्सा है और इस मामले में न्यायालय के हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि पूर्व आदेश में असंसदीय भाषा के उल्लेख के आधार पर लगाई गई लागत को हटाते हुए अपील का आंशिक निराकरण किया गया। अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि उनका स्थानांतरण 30 अप्रैल को बैढ़न से शास. महावि.बहोरीबंद, जिला कटनी कर दिया गया, जबकि वह शीघ्र सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इस पर राज्य शासन ने न्यायालय को बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है, इसलिए डेढ़ वर्ष में सेवानिवृत्ति का दावा सही नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया कि वर्ष 2023 में कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी होने के कारण उनका स्थानांतरण लागू नहीं किया गया था। चार वर्ष की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर उनका तबादला किया गया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि उनके निर्देशन में कई शोधार्थी पीएचडी कर रहे हैं और विश्वविद्यालय बदलने से उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। डबल बेंच ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह सिद्ध हो कि स्थानांतरण के बाद शोध निर्देशन जारी नहीं रह सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि बैढ़न महावि. में रिक्त पदों का मुद्दा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र का विषय है, न्यायालय का नहीं। अंतत: डबल बेंच ने केवल लागत हटाने का आदेश देते हुए शेष आदेश को यथावत रखा और रिट अपील का निस्तारण कर दिया।
