काठमांडू, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत के साथ सकारात्मक कूटनीतिक बातचीत की इच्छा जताई है। ऊपरी सदन में अपने बयान में उन्होंने भारत और नेपाल के बीच मौजूद ऐतिहासिक, मजबूत और करीबी संबंधों पर विशेष जोर दिया। खनाल ने स्पष्ट किया कि नेपाल सरकार किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप के बिना, ऐतिहासिक समझौतों और नक्शों के आधार पर इस पुराने मसले का शांतिपूर्ण और सम्मानजनक समाधान चाहती है।
विवादों पर स्पष्ट रुख और तालमेल
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के पिछले विवादित बयानों से उपजे तनाव के बीच, विदेश मंत्री के इस बयान को संबंधों में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। भारत का भी लंबे समय से यही रुख रहा है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे सीमाई मुद्दों को केवल द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझाया जाना चाहिए। सुस्ता क्षेत्र में तटबंध निर्माण जैसे कार्य भी दोनों देशों के बीच आपसी सहमति और तालमेल का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहे हैं।
जॉइंट वर्किंग ग्रुप की आगामी बैठक
सीमा प्रबंधन और अतिक्रमण जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए दोनों देशों ने एक ठोस रणनीति बनाई है। इस दिशा में नेपाल-भारत जॉइंट वर्किंग ग्रुप का गठन किया गया है, जो इन संवेदनशील मामलों की बारीकी से जांच करेगा। इस ग्रुप की अगली महत्वपूर्ण बैठक इसी साल अगस्त महीने में भारत में आयोजित होने वाली है, जिससे दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग और सीमा सुरक्षा को लेकर एक नया रास्ता खुलने की उम्मीद है।

