इंदौर:कांग्रेस में दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच छिड़ी जुबानी जंग का मजा ले रहे बीजेपी नेता अब अपनी ही पार्टी में उठे तूफान के बाद खामोश हो गए हैं. इंदौर की उपेक्षा को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पत्र से राजनीतिक हलकों में तूफान आ गया है. विजयवर्गीय के पत्र के बाद भाजपा सरकार सकते में है.
पत्र से मचे बवाल के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इंदौर में मंत्री विजयवर्गीय के साथ सभी विधायकों के साथ चर्चा करेंगे. यह पहला मौका है, जब मुख्यमंत्री इंदौर के विकास कार्यों पर जनप्रतिनिधियों से सीधे मुखातिब होंगे. कार्यक्रम में विजयवर्गीय विशेष अतिथि होंगे.
कैलाश विजयवर्गीय ने लगाया इंदौर की उपेक्षा का आरोप
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हाल ही में राज्य सरकार पर इंदौर की उपेक्षा से व्यथित होकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने जिले के प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इंदौर के विकास कार्यों को लेकर असहयोग और उपेक्षा करने का आरोप लगाया है. पत्र सार्वजनिक चर्चा में आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से डैमेज कंट्रोल करने के लिए अब आननफानन में 3 जुलाई को इंदौर की तरक्की पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विकास के मामले में जनप्रतिनिधियों से खुली चर्चा करेंगे.
‘उम्मीदों का शहर इंदौर’ विषय पर जन संवाद
3 जुलाई को बीबीसी में आयोजित कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर कैलाश विजयवर्गीय को आमंत्रित किया गया है. इसके अलावा इंदौर के सभी विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं. खास बात यह है कि इस बार पूरे कार्यक्रम की कमान मुख्यमंत्री कर्यालय से सांसद शंकर लालवानी को दी गई है. लालवानी द्वारा कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर सभी नेताओं को निमंत्रण भेजने की चर्चा हैं.
अब क्यों जागृत हुई आत्मा – सज्जन
राजनीतिक क्षेत्र में कैलाश विजयवर्गीय के घोर विरोधी कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि कैलाश को इस बात की भनक लग गई है कि प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार होने जा रहा है. विजयवर्गीय सहित कुछ नेताओं को मंत्री पद से हटाया जा सकता है. इसको लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की आत्मा जागृत हुई है और इसी को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री को ये पत्र लिखा है. सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि पहले भी विजयवर्गीय ने कहा था कि मैं शोले का हाथ कटा ठाकुर हूं ,सरकार में मुझे तवज्जो नहीं दी जा रही है. उसी समय मैंने कैलाश विजयवर्गीय को सलाह दी थी कि मंत्री पद से इस्तीफा देकर विधायक के रूप में लोगों के बीच रहो.
