उज्जैन: शहर में कई स्थानों पर ई-रिक्शा चलते-चलते अचानक बंद हो रहे हैं. इससे न केवल यात्रियों और श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि ई-रिक्शा चालकों को भी भीषण गर्मी और बारिश के बीच अपने वाहन हाथ से धक्का देकर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. कई बार व्यस्त मार्गों पर ई-रिक्शा बंद होने से यातायात बाधित होने और जाम की स्थिति भी निर्मित हो रही है.
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी में देश-विदेश से प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. महाकाल मंदिर, देवालयों और मोक्षदायिनी शिप्रा के घाटों तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा सबसे सुलभ और किफायती परिवहन साधन माना जाता है. यही कारण है कि उज्जैन में ई-रिक्शा यात्रियों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद बन चुके हैं. इन दिनों ई-रिक्शा चालकों और यात्रियों के सामने एक नई और गंभीर तकनीकी समस्या खड़ी हो गई है.
बैटरी सिस्टम हो रहा हैक
नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार, कुछ ई-रिक्शा संचालकों ने आशंका जताई है कि बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) को मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से प्रभावित किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि बीएटी-बीएमएस नामक एक मोबाइल ऐप के जरिए कुछ प्रकार की लिथियम बैटरियों से कनेक्ट होकर उनकी सेटिंग्स तक पहुंच बनाई जा सकती है. यदि बैटरी का ब्लूटूथ या टेलीमैटिक्स सिस्टम असुरक्षित हो तो बैटरी को अस्थायी रूप से डिसेबल किया जा सकता है, जिससे ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाता है.
ब्लूटूथ और जीपीएस से शंका
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक इलेक्टि्रक वाहनों और कई ई-रिक्शा बैटरियों में ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, टेलीमैटिक्स, जीपीएस और रिमोट मॉनिटरिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है. इन प्रणालियों का उद्देश्य बैटरी की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, लेकिन यदि इनके सुरक्षा मानकों में कमी हो या अनधिकृत रूप से इन तक पहुंच बनाई जाए, तो संचालन प्रभावित हो सकता है.
फाल्ट नहीं पता चलता
ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि वाहन बंद होने के बाद गैरेज में जांच कराने पर भी कोई स्पष्ट तकनीकी खराबी सामने नहीं आती. इससे चालक असमंजस में हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. कई चालकों का कहना है कि वे तकनीकी जानकारी के अभाव में यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिर उनके वाहन अचानक क्यों बंद हो रहे हैं.
जिम्मेदारी किसकी
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ई-रिक्शा में उपयोग हो रही स्मार्ट बैटरियों की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है? क्या किसी मोबाइल ऐप के माध्यम से इनके संचालन को प्रभावित किया जा सकता है? और यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? जहां गाड़ियां बंद होती है वहां यात्री और चालक तो परेशान होते ही है थोड़ी देर में जाम भी लगने लग जाता है और ई रिक्शा वालों को लोग भला बुरा कह रहे हैं.
तकनीकी जांच की जरूरत
जनहित को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, परिवहन विभाग और साइबर विशेषज्ञों को इस पूरे मामले की तकनीकी जांच करानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ई-रिक्शा के अचानक बंद होने के पीछे तकनीकी खराबी है या फिर किसी ऐप अथवा अन्य माध्यम से बैटरियों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है. यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में श्रद्धालुओं, यात्रियों और ई-रिक्शा संचालकों के लिए यह एक बड़ी समस्या बन सकती है
