तेहरान, 01 जुलाई (वार्ता) ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने बुधवार को कहा कि ईरान समझौते को लागू करने के अगले चरण में तब तक कदम नहीं उठाएगा, जब तक इसकी शुरुआती पांच धाराओं को पूरी तरह से ‘अंतिम रूप’ नहीं दे दिया जाता। श्री गालिबाफ ने टीवी पर कहा कि समझौते की पहली शर्त साफ कहती है कि लेबनान की जमीन और उसकी सीमाओं की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध अब खत्म होना चाहिए, आगे कोई सैन्य कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और जो लोग अपने घर छोड़कर चले गए हैं, उन्हें वापस लौटने दिया जाना चाहिए।
संसद अध्यक्ष ने कहा कि समझौते के तहत यह आवश्यक है कि ‘लेबनानी क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने वाले बलों को पीछे हटना होगा।’ उन्होंने इसे उन शत्रुताओं को समाप्त करने के लिए आवश्यक बताया जो युद्धविराम की आड़ में जारी थीं।
श्री गालिबाफ ने कहा कि गुरुवार और शुक्रवार को अचानक झड़पें तेज हो गईं, क्योंकि कुछ पक्षों ने समझौते के क्रियान्वयन को बाधित करने के प्रयास में संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाकर गंभीर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि लेबनान के संबंध में समझौते के क्रियान्वयन को लेकर ईरान और अमेरिका दोनों ही इसके गारंटर के रूप में कार्य करते हैं। श्री गालिबाफ के अनुसार, यह सहमति भी बनी है कि ‘युद्ध की समाप्ति की निगरानी करने और लेबनान की राष्ट्रीय संप्रभुता को बहाल करने के लिए ईरान, अमेरिका और लेबनान एक संयुक्त समिति का गठन करेंगे।’
उन्होंने कहा कि ईरान ने समिति में अपने प्रतिनिधि के रूप में अपने राजदूत को नियुक्त किया है, जबकि अमेरिका ने अपने प्रतिनिधि को नामित किया है और लेबनान द्वारा भी जल्द ही अपने प्रतिनिधि को नामित किए जाने की उम्मीद है। अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले लेबनान के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से बात की थी और इस तंत्र को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए लगातार चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि स्थिति ‘धीरे-धीरे स्थिर हो रही है’, लेकिन जमीन पर विरोधी ताकतों की नजदीकी के कारण अभी भी छोटी-मोटी और बिखरी हुई झड़पें हो रही हैं।
श्री गालिबाफ ने कहा कि मीडिया संस्थान कभी-कभी ‘छोटी झड़पों को बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं’, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि स्थितियों को पूरी तरह से स्थिर होने में ‘समय लगेगा।’ उन्होंने कहा कि संघर्ष के पिछले दौर के दौरान, बेहद संक्षिप्त युद्धविराम में भी भारी संख्या में लोग हताहत हुए थे, जिसमें एक ही दिन में लगभग 1,000 घायल और करीब 300 शहीद शामिल थे, जो स्थिति की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने इस बात को फिर दोहराया कि जब तक सभी पांच शुरुआती धाराएं पूरी तरह से स्थिर और अंतिम रूप नहीं ले लेतीं, तब तक ईरान इस समझौते के अगले चरण की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा।

