यूकेपीएनपी ने पीओके में ‘मानवाधिकारों के भयावह संकट’ की चेतावनी दी, संयुक्त राष्ट्र से तुरंत कार्रवाई की मांग की

इस्लामाबाद, 01 जुलाई (वार्ता) यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने बुधवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में ‘मानवाधिकारों के भयावह संकट’ पर गहरी चिंता जताते हुए पाकिस्तानी अधिकारियों के कथित अत्याचारों को लेकर तुरंत अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है। यूकेपीएनपी के प्रवक्ता सरदार नासिर अजीज खान ने कहा कि पार्टी ने ‘स्विस कश्मीर ह्यूमन राइट्स कमीशन’ (एसकेएचआरसी) के साथ मिलकर 26 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को आपातकालीन अपील सौंपी है। इस अपील में सरकार के इशारे पर शांतिपूर्ण नागरिकों पर की जा रही क्रूर कार्रवाई का खुलासा किया गया है।

यूकेपीएनपी और एसकेएचआरसी ने हिरासत और फर्जी मुठभेड हुई हत्याओं की जांच करने और अवैध नाकेबंदी को हटाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र तथ्य-अन्वेषण दल को तुरंत वहां भेजने की मांग की है। यूकेपीएनपी प्रवक्ता ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों ने निहत्थी भीड़ के खिलाफ आधुनिक रणनीतिक ड्रोन और असली गोलियों का इस्तेमाल किया है। इस कारण 24 से अधिक नागरिकों की मौत हो गयी और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हो गये, जिनकी स्थिति अब जीवन भर के लिए अपाहिज होने जैसी हो गयी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है, जबकि क्षेत्रीय सीमाओं को सील कर दिया गया है।

इससे भोजन, गेहूं का आटा और चिकित्सा सहायता की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गयी है। श्री खान के अनुसार, अर्धसैनिक बलों ने क्षेत्र के अस्पतालों पर भी कब्जा कर लिया है, जिस कारण घायल नागरिक गिरफ्तारी के डर से इलाज कराने से बच रहे हैं। यूकेपीएनपी और एसकेएचआरसी ने ‘हिरासत और मुठभेड में हुई हत्याओं’ की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र तथ्य-अन्वेषण दल के गठन की मांग की है। इसके साथ ही, पीओके में लगी ‘अवैध नाकेबंदी’ को तुरंत हटाने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर खामोश नहीं बैठ सकता। पार्टी ने कहा कि पांच जून से संचार ठप करने और नाकेबंदी लागू करने के कारण भोजन, दवाओं, शिशु आहार और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हुई है, जिससे लाखों लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है।

यूकेपीएनपी ने कहा, “असहाय लोगों को इलाज से वंचित किया जा रहा है। घायलों, बुजुर्गों और पुरानी व गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को अस्पतालों से लौटाया जा रहा है। शिशु संकट में हैं। सामान्य स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है और बच्चों को जीवन रक्षक टीके नहीं मिल पा रहे हैं। प्रसूति सेवाएं ठप हो चुकी है। गंभीर जटिलताओं का सामना कर रही गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा सहायता नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके और उनके अजन्मे बच्चों, दोनों का जीवन खतरे में पड़ गया है।” बिजली की उचित दरों और खाद्य सुरक्षा जैसे बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे शांतिपूर्ण गठबंधन, ‘जम्मू-कश्मीर ज्वायंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेकेजेएएसी) पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत अवैधानिक तरीके से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

पार्टी ने विपक्षी नेताओं को इस क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए पाकिस्तानी सरकार की भी तीखी आलोचना की। यूकेपीएनपी ने तुरंत अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन से आग्रह किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों, मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक मीडिया को रावलकोट तथा अन्य प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की अनुमति दे। पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों को अपराध की श्रेणी में नहीं डाला जाना चाहिए। बयान में कहा गया है, “शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन एक बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी या अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग करने और मानवता के खिलाफ अपराध करने के लिए जो लोग भी जिम्मेदार हैं, उन्हें कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।”

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