
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगाट की एकलपीठ ने छह माह के भीतर दोबारा किए गए स्थानांतरण पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर पुनर्विचार के निर्देश दिए हैं। एकलपीठ ने स्थानांतरण आदेश में विसंगतियां पाते हुए स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय होने तक डॉ. ज्योति कुमरे को शासकीय पीजी कालेज सिवनी में ही अपनी सेवाएं देते रहने की राहत दी है।
याचिका में डॉ. ज्योति कुमरे की ओर से अधिवक्ता अभय पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 15 जून 2026 के स्थानांतरण आदेश के जरिए याचिकाकर्ता को लगभग दो सौ किलोमीटर दूर शासकीय महाविद्यालय साईखेड़ा भेज दिया गया, जबकि वे वर्तमान में शासकीय पीजी कालेज सिवनी में पदस्थ हैं। यह भी बताया गया कि 18 अक्टूबर 2025 को ही उनका पूर्व स्थानांतरण हुआ था और महज छह माह के भीतर दोबारा तबादला कर दिया गया, जो स्थानांतरण नीति और प्रशासनिक औचित्य दोनों के विपरीत है। राज्य शासन की ओर से कहा गया कि स्थानांतरण जिले के भीतर किया गया है और इससे याचिकाकर्ता को कोई प्रतिकूल नागरिक परिणाम नहीं भुगतना पड़ेगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि कम अवधि में दोबारा स्थानांतरण किया गया है। न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि स्थानांतरण आदेश में कुछ असंगतियां दिखाई देती हैं तथा याचिकाकर्ता के स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की पदस्थापना भी नहीं की गई है। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने याचिका का निराकरण करते हुए सक्षम अधिकारियों को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर लंबित अभ्यावेदन पर विधिसम्मत निर्णय ले, साथ ही आदेशित किया कि तब तक डॉ ज्योति कुमरे शासकीय पीजी कालेज सिवनी में यथावत कार्य करती रहेंगी।
