नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (वार्ता) आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में राजधानी में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस भारतीय चिकित्सा पद्धति की बढ़ती लोक प्रियता पर संतोष जताते हुए इसके चिकित्वकों और शोधकर्ताओं से इस पद्धति के बारे में भ्रामक सूचनाओं के प्रसार पर रोक, तर्कसंगत विपणन और जागरूकता बढ़ाए जाने पर बल दिया।
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान आयुर्वेद को स्वास्थ्य और कल्याण के समग्र दृष्टिकोण के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम जन स्वास्थ्य के स्थायित्व और प्राकृतिक जीवन शैली पर केंद्रित था।
आयुर्वेद दिवस (17 अक्टूबर) के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद के बारे में आमजन में वैज्ञानिक रूप से मान्य पारंपरिक ज्ञान का संचार के विषय में एनआईएससीपीआर स्वस्तिक व्याख्यान में सीसीआरएएस-केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) के डॉ. किशोर पटेल ने जीवनशैली और तनाव से जुड़ी बीमारियों के कारणों पर चर्चा की और समग्र स्वास्थ्य के लिए आचार, रसायन और सद्वृत्ति की अवधारणाओं के माध्यम से संतुलित पोषण, संयमित आहार और नैतिक जीवन जीने के महत्व पर बल दिया।
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने विश्व में आयुर्वेद के विस्तार पर संतोष जताते हुए कहा कि एक दशक से भी कम समय में आयुर्वेद दिवस एक राष्ट्रीय उत्सव से एक वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन के रूप में बदल गया है। उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सकों और शोधकर्ताओं द्वारा गलत सूचनाओं का विरोध करने और मिलावट रोकने, मानकीकृत योगों, साक्ष्य-आधारित एकीकरण, तर्कसंगत विपणन और जन जागरूकता की वकालत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पारंपरिक ज्ञान को जनता के बीच प्रसारित करने वाली स्वस्तिक पहल की भी सराहना की।
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के प्रशासन नियंत्रक और राजेश कुमार सिंह रोशन संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुमन रे भी चर्चा में भाग लिया।

