नयी दिल्ली, 30 जून (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने बिहार के भोजपुर जिला में 28 वर्षीय भारत भूषण तिवारी के फर्जी एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी को पटना उच्च न्यायालय जाने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय जाने की स्वतंत्रता देते हुए टिप्पणी की कि स्थानीय परिस्थितियों की बेहतर निगरानी के लिए उच्च न्यायालय जाना अधिक उचित होगा।
अधिवक्ता विशाल तिवारी ने अपनी याचिका में संबंधित पुलिस टीम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने इस मौत की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के गठन का भी आग्रह किया था।
आरोपों के अनुसार, 17 जून को एक एनकाउंटर में भारत भूषण तिवारी की मौत हुई थी। याचिका में तिवारी के पिता और स्थानीय लोगों के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि आत्मसमर्पण करने और हथियार डाल देने के बावजूद पुलिस ने उसे गोली मार दी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि तिवारी ने इस एनकाउंटर का अपने फेसबुक पेज पर लाइवस्ट्रीम किया था। यह घटना पुलिस के उस दावे के 24 घंटे के भीतर हुई, जिसमें उन्होंने तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए उसे सुरक्षित हिरासत में लेने की बात कही थी।
याचिका में ‘पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले के दिशा-निर्देशों के पालन और निष्पक्ष जांच पर सवाल उठाये गये थे। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि पुलिस का इस तरह कानून हाथ में लेना पूरी कानून व्यवस्था को ध्वस्त करता है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
