औद्योगिक उपयोग की जमीन पर काटी आवासीय कॉलोनी

इंदौर:शहर के सुपर कॉरिडोर से लगी आईसीजी गोलकुंडा कॉलोनी संचालकों को टीएनसीपी ने आज दूसरा नोटिस जारी किया है. आज दिया नोटिस में पिछले नोटिस का जवाब नही पर कॉलोनी के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है. उक्त आवासीय कॉलोनी 26 एकड़ से ज्यादा जमीन पर काटी गई है, जिसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा जमीन का उपयोग मास्टर प्लान में औद्योगिक है.
शहर में सुपर कॉरिडोर के पास और मल्हारगंज तहसील के गांव टिगरिया बादशाह में आईसीजी गोलकुंडा आवासीय कॉलोनी विकसित की गई है. इसके संचालक महेंद्र और सचिन पुरुषोत्तम पाटीदार है. उक्त जमीन का मास्टर प्लान में लैंड यूज औद्योगिक है, मगर टीएनसीपी से आवासीय कॉलोनी की अनुमति जारी कर दी. उक्त मामले में एक अधिवक्ता द्वारा शिकायत की गई थी, उसके बाद टीएनसीपी ने 8 दिसंबर को पहला नोटिस दिया था.

टीएनसीए ने कॉलोनी संचालक महेंद्र और सचिन पिता पुरषोत्तम पाटीदार ने नोटिस का जवाब मांगा था, लेकिन पाटीदार बंधुओ ने जवाब नहीं दिया. ध्यान रहे कि नव भारत ने पूर्व में भी इस मामले को लेकर टीएनसीपी की कार्य शैली पर सवाल उठाए थे. उक्त कॉलोनी और खसरे पर जारी अनुमति की डिटेल्स कंप्यूटर से हटा दी है. ऑनलाइन कंप्यूटर अब उक्त गोलकुंडा कॉलोनी अनुमति को नहीं दिखा रहा है. इससे समझा जा सकता है कि नियमों को ताक में रख कर अनुमति जारी की गई है.

जानकारी बगैर विकास अनुमति
ग्राम टिगरिया बादशाह स्थित गोलकुंडा कॉलोनी 300 सौ प्लाटों के कॉलोनी है, जो 10.93 हेक्टेयर पर औद्योगिक उपयोग की जमीन पर आवासीय बनाकर बेची गई है. उक्त कॉलोनी में जीवन भर की कमाई खर्च प्लॉट खरीदने वाले लोगों के साथ टीएनसीपी और जमीन मालिकों ने सीधा धोखा कर दिया है. सबसे बड़ी बात यह है कि नगर निगम ने भी टीएमसीपी से जानकारी लिए बगैर विकास अनुमति जारी कर दी है.

संचालकों ने नहीं दिया नोटिस का जवाब
अधिवक्ता की शिकायत पर टीएनसीए ने नोटिस क्रमांक 3866 के द्वारा 8 दिसंबर 25 को नोटिस जारी किया था. नोटिस में आईसीजी गोलकुंडा कॉलोनी के संचालक महेंद्र और सचिन पाटीदार से जारी नोटिस में छलपूर्वक झूठी जानकारी देकर अनुमति लेना बताते हुए जवाब मांगा था, गोलकुंडा कॉलोनी के संचालकों नोटिस का जवाब नहीं दिया. 11 फरवरी तक जवाब नहीं देने के विरुद्ध टीएनसीपी संयुक्त संचालक ने आज पत्र क्रमांक 584 द्वारा दूसरा नोटिस जारी किया है. नोटिस में मध्य प्रदेश भूमि विकास अधिनियम 1973 एवं टीएनसीपी 2012 के प्रावधानों के तहत अनुमति निरस्ती की कारवाई करने चेतावनी दी है.

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