मस्कट, 29 जून (वार्ता) ईरान-ओमान ने नवनिर्मित ‘संयुक्त होर्मुज समिति’ की पहली बैठक आयोजित की है। रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के भविष्य के शासन और प्रबंधन पर व्यवस्थित बातचीत की दिशा में यह औपचारिक कदम है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब 14 सूत्रीय समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने के बाद ईरान-अमेरिका के बीच लगातार चार दिनों तक गोलीबारी हुई थी। ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम घरीबाबादी के अनुसार, यह बैठक उनकी आधिकारिक यात्रा के दौरान मस्कट में हुई। बैठक में ओमान के विदेश राज्य मंत्री अब्दुलअजीज अल-हिनाई के साथ चर्चा शामिल थी। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के तात्कालिक समुद्री घटनाक्रमों के साथ-साथ इसके प्रबंधन ढांचे से जुड़े दीर्घकालिक सवालों पर भी चर्चा की गयी।
इस वार्ता का उद्देश्य परिचालन संबंधी चिंताओं को दूर करना है और साथ ही भविष्य के प्रबंधन के प्रबंधों के सिद्धांतों का प्रारूप तैयार करना है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, श्री घरीबाबादी ने कहा कि यह बातचीत ‘तटीय राज्यों के संप्रभु अधिकारों के अनुरूप आयोजित की गयी थी। उन्होंने क्षेत्रीय हितधारकों से जुड़ी मौजूदा राजनयिक समझ का भी हवाला दिया। यह बैठक 22 जून को जारी संयुक्त बयान के बाद हुई है। यह बयान ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मस्कट दौरे के बाद आया था। इसमें दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया था कि इस जलडमरूमध्य से जुड़ा कोई भी प्रबंध तटीय राज्यों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का सम्मान करने वाला होना चाहिए।
फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा पारगमन गलियारों में से एक है। यह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कूटनीति का केंद्र रहा है।ईरान लगातार दावा करता रहा है कि इस जलडमरूमध्य से संबंधित किसी भी व्यवस्था में शामिल तटीय राज्यों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसके अलावा, हाल के हमलों के बाद बढ़ती क्षेत्रीय ताकतों और तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सभी पक्षों से होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने से बचने का आह्वान किया है।
बगदाद में अपने इराकी समकक्ष के साथ संवाददाता सम्मेलन में श्रीअराघची ने चेतावनी दी, “इस जलमार्ग पर वैकल्पिक व्यवस्था थोपने का कोई भी प्रयास स्थिति को और खराब करेगा। इससे जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और स्थिर करने के प्रयासों में देरी होगी।” क्षेत्र में हाल ही में हुए हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों से ‘केवल परिस्थितियां अधिक जटिल होंगी’ और तनाव और बढ़ेगा। उन्होंने सभी पक्षों से ‘मौजूदा समझौता ज्ञापन का पालन करने और इसे पटरी से उतरने से रोकने’ का भी आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लगातार बढ़ता तनाव पश्चिम एशिया में संघर्ष को कम करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों को कमजोर करेगा। बातचीत को बढ़ावा देने में ओमान की भूमिका क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ के रूप में उसकी पुरानी स्थिति के अनुरूप है। यह देश अक्सर ईरान और अन्य क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय पक्षों के बीच एक राजनयिक सेतु के रूप में काम करता रहा है, जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़े अत्यधिक तनाव के दौर भी शामिल हैं।

