खंडवा: आमाखुजरी जंगल में वन भूमि पर दोबारा हुए अतिक्रमण के खिलाफ सोमवार सुबह जिला प्रशासन ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की। वन विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग के करीब 600 अधिकारी-कर्मचारी, भारी पुलिस बल और 30 जेसीबी मशीनों के साथ गुड़ी रेंज के जंगल में पहुंचे। प्रशासन करीब 200 एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने में जुटा है। रविवार को वन अमले पर हुए हमले के बाद यह कार्रवाई और अधिक सख्ती के साथ की जा रही है।
कार्रवाई के दौरान एक अप्रत्याशित घटना भी सामने आई। कैंपा वाहन में रखी आंसू गैस की पेटी से अचानक गैस का रिसाव होने लगा। वाहन में मौजूद पुलिसकर्मी इसकी चपेट में आ गए और उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई। समय रहते वाहन रोका गया और पेटी खोलकर गैस बाहर निकाली गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
यह वही इलाका है जहां वन विभाग ने कुछ समय पहले करीब 500 एकड़ वन भूमि से अतिक्रमण हटाकर दोबारा कब्जा रोकने के लिए बड़े-बड़े कंटूर बनवाए थे।
इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों ने करीब 200 एकड़ जमीन पर फिर से कब्जा कर खेती शुरू कर दी। इसी कारण प्रशासन को दोबारा संयुक्त अभियान चलाना पड़ रहा है।रविवार को जब वन विभाग की टीम अवैध बुआई रोकने पहुंची थी, तब बड़ी संख्या में अतिक्रमणकारियों ने विरोध करते हुए पथराव और लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। आरोप है कि महिलाओं को आगे कर गोफन से पत्थर फेंके गए। इस हमले में विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड के आठ वनकर्मी घायल हो गए थे। घायलों में किसी का सिर फूटा तो किसी के कान में गंभीर चोट आई। सभी का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।
घायल वनकर्मियों ने आरोप लगाया कि हमले के बाद करीब दो घंटे तक न तो पुलिस मौके पर पहुंची और न ही एंबुलेंस, जिससे उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल सका। घटना के बाद प्रशासन ने रणनीति बदलते हुए सोमवार को भारी पुलिस बल, वन अमले और राजस्व अधिकारियों के साथ संयुक्त कार्रवाई शुरू की है। जंगल के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। अभियान की निगरानी एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर और डीएफओ राकेश कुमार डामोर स्वयं कर रहे हैं।
बड़ा सवाल यह है कि जब वन विभाग पहले ही इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर सुरक्षा इंतजाम कर चुका था, तो आखिर 200 एकड़ वन भूमि पर दोबारा कब्जा कैसे हो गया यह जांच का विषय है।
