इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर की पहचान रखने वाले इंदौर में बिजली के खंभों पर इंटरनेट, केबल, केबल और ऑप्टिकल फाइबर के तारों का बढ़ता जंजाल गंभीर समस्या बनता जा रहा है. एक ओर बिजली वितरण कंपनी को इन केबलों से हर वर्ष करोड़ों रुपये का किराया मिलता है, वहीं दूसरी ओर केबलों को व्यवस्थित करने और अनुपयोगी तार हटाने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नजर नहीं आते. इसका असर शहर की सुंदरता के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है.
शहर के कई इलाकों में बिजली के खंभों पर बेतरतीब ढंग से लटकती केबलें आम दृश्य बन चुकी हैं. कई स्थानों पर तारों के बड़े-बड़े गुच्छे बने हुए हैं, जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बारिश और तेज हवा के दौरान शॉर्ट सर्किट तथा आगजनी जैसी घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि जहां केबलों का अत्यधिक जाल है, वहां तकनीकी खराबी की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है.
स्मार्ट सिटी की छवि पर असर
स्वच्छता और स्मार्ट सिटी के लिए लगातार पुरस्कार जीतने वाले इंदौर की छवि पर भी इन अव्यवस्थित तारों का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. मुख्य मार्गों से लेकर कॉलोनियों तक फैले केबल शहर की सुव्यवस्थित और आकर्षक तस्वीर को धूमिल कर रहे हैं.
बिना समन्वय कार्रवाई से सेवाएं प्रभावित
हाल के समय में बिना समन्वय के केबल काटने और हटाने की शिकायतें भी हुई हैं. इससे इंटरनेट और केबल टीवी सेवाएं प्रभावित हुईं तथा उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा. इससे स्पष्ट है कि केबल प्रबंधन और मॉनिटरिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है.
बिजली विभाग पर उठ रहे सवाल
केबल ऑपरेटरों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से बिजली विभाग खंभों के उपयोग के बदले हर वर्ष करोड़ों रुपये का किराया वसूलता है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब विभाग को इतना राजस्व मिल रहा है तो केबलों को व्यवस्थित रखने, अनुपयोगी तार हटाने और नियमित निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं दिख रही.
स्क्रैप वैल्यू नहीं, इसलिए नहीं हट रहीं पुरानी केबलें
जानकारों के अनुसार अनुपयोगी केबलों की स्क्रैप वैल्यू लगभग शून्य होने के कारण ऑपरेटर उन्हें हटाने में रुचि नहीं लेते. नई केबल डाल दी जाती है, जबकि पुरानी खंभों पर ही छोड़ दी जाती है. इससे समय के साथ केबलों का जंजाल लगातार बढ़ता जा रहा है.
बिजली विभाग का पक्ष
बिजली वितरण कंपनी के सिटी एसी एम. गर्ग ने बताया कि विभाग समय-समय पर अवैध एवं अव्यवस्थित केबलों के खिलाफ अभियान चलाता है. ऑपरेटरों को निर्धारित मानकों के अनुसार ही सिंगल केबल लगाने की अनुमति है. यदि कहीं नियमों का उल्लंघन कर तारों के गुच्छे बनाए जाते हैं तो संबंधित ऑपरेटरों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.
नगर निगम का पक्ष
नगर निगम के अधिकारी अश्विन जनवोदय ने बताया कि शहर की सुंदरता बनाए रखने के लिए कई बार अव्यवस्थित केबल हटाने की कार्रवाई की जा चुकी है. अधिकांश मामलों में ऑपरेटर नई केबल तो डाल देते हैं, लेकिन पुरानी नहीं हटाते. इस संबंध में उन्हें कई बार नोटिस भी जारी किए गए हैं. निगम द्वारा विभिन्न बाजार क्षेत्रों में अव्यवस्थित केबल हटाने की कार्रवाई की गई है.
एजेंसियों की जिम्मेदारी
नगर निगम का कहना है कि यदि केबल ऑपरेटर भी स्वच्छता अभियान में सहयोग करें और केबलों को व्यवस्थित रखें तो शहर की सुंदरता और सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी. निगम ने माना कि फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में खंभों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इसे सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना सभी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है.
सुरक्षा मानकों का सख्ती से हो पालन
एमपीईबी के तकनीकी कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष शंभूनाथ सिंह ने कहा कि विद्युत खंभों पर दूसरी एजेंसियों की केबल नहीं होनी चाहिए. यदि लगाना आवश्यक हो तो ब्रैकेट और पाइप के माध्यम से सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्थित तरीके से लगाया जाए, न कि बड़े-बड़े गुच्छों में. उन्होंने कहा कि खंभों पर कई अवैध केबलें भी संचालित हो रही हैं, जिन्हें बिजली कंपनी और नगर निगम को संयुक्त अभियान चलाकर हटाना चाहिए. उनके अनुसार अव्यवस्थित केबलों से विद्युत कर्मचारियों के लिए दुर्घटना, आगजनी, बिजली कंपनी को आर्थिक नुकसान और आमजन की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है.
