इंदौर: शहर का मास्टर प्लान आखिर कब आएगा? पुराने मास्टर प्लान का समय खत्म हुए 5 बीत चुके है. मास्टर प्लान को लेकर शहर के आसपास 79 गांव की जमीनों पर प्रत्यक्ष रूप से रोक लगा रखी है. दूसरी ओर अप्रत्यक्ष रूप से भोपाल द्वारा जमीन की विकास अनुमति चुपचाप तरीके से जारी हो रही है. खास बात यह है कि कितनी जमीनों की एनओसी जारी की गई है? इसका लेखा जोखा भी स्थानीय टीएनसीपी कार्यालय के पास नहीं है.
मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से कवायद चल रही है कि एक महीने में होगा, एक हफ्ते में या एक पखवाड़े में होगा. वास्तविकता यह है कि किसी को पता नहीं है कि इंदौर का मास्टर प्लान कब घोषित होगा? मास्टर प्लान किसी भी शहर का विजन डॉक्यूमेंट होता है, लेकिन शहर के जनप्रतिनिधियों को इसमें कोई रुचि नहीं है. खास बात यह है कि विभाग के मंत्री इंदौर से ही विधायक है, मगर वे भी कई बार बैठकें ले चुके है, लेकिन नजीता सिफर ही है.
बताया जा रहा है कि मास्टर प्लान में 79 गांव की जमीन शामिल है और 3 जिलों की सीमा से सीधा जोड़ दिया है. करीब 950 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मास्टर प्लान का एरिया होगा. विजन डॉक्यूमेंट कब बाहर आएगा? यह सरकार के मुखिया और प्रमुख सचिव संजय दुबे ही जाने. यह बात अलग है कि प्रमुख सचिव एक साल पहले जल्द जारी करने की बात कह चुके थे, लेकिन समझा जा सकता है कि जल्दी का मतलब असमंजस है, फिर कई साल बीत जाएं, कोई फर्क नहीं पड़ता है.
ऐसी चर्चा है कि इंदौर 79 गांव को मास्टर प्लान में शामिल किया गया है. उनमें टीएनसीपी धारा 16 का उपयोग करके अप्रत्यक्ष रूप से जमीनों को अनुमतियां जारी की जा रही है. वहीं, कुछ जमीनों को मास्टर प्लान में धारा 30 के तहत भी एनओसी देने की चर्चा है. प्रत्यक्ष रूप से 79 गांवों में एनओसी पर रोक है, लेकिन भोपाल से चुपचाप एनओसी जारी हो रही है. कितनी एनओसी इंदौर 79 गांवों में जारी हो चुकी है और कितनी एनओसी के फाइलें भोपाल में पेंडिंग है. इसकी कोई अधिकृत संख्या और जानकारी स्थानीय टीएनसीपी विभाग के पास नहीं है. स्थानीय अधिकारी सिर्फ एक ही बात बोलते है कि सब भोपाल से जानकारी मिलेगी.
भोपाल भेज दिया
टीएनसीपी संयुक्त संचालक शुभाशीष बैनर्जी ने कहा कि हमने बनाकर भोपाल भेज दिया है. काफी लंबा समय हो चुका है. क्यों जारी नहीं किया जा रहा है? आप शासन स्तर पर पता कर लें.
यह भी हुआ है
विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा और भोपाल में स्पष्ट कहा था कि मास्टर प्लान हमने भेज दिया है. अब मुख्यमंत्री निर्णय लेंगे. वहीं विभाग एसीएस प्रमुख सचिव संजय दुबे तो एक साल पहले कह दिया है कि जल्दी घोषित कर देंगे, जो पांच साल बीतने के बाद भी जारी नहीं हो सका.
