लेबनान के साथ नया समझौता ईरान के लिए बड़ा रणनीतिक झटका : नेतन्याहू

यरुशलम, 27 जून (वार्ता) इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल और लेबनान के बीच नव हस्ताक्षरित रूपरेखा समझौते को ईरान के लिए बड़ा रणनीतिक झटका करार देते हुए दोहराया है कि जब तक हिजबुल्ला निरस्त्र नहीं हो जाता और इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा बना रहता है, तब तक इजरायली सैनिक दक्षिणी लेबनान में तैनात रहेंगे।

समझौते में व्यापक रूप से इस बात की पुष्टि की गयी है कि हिजबुल्ला और अन्य सशस्त्र समूहों से उत्पन्न खतरा समाप्त होने के बाद इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना वापस बुलायेगा तथा कब्जे वाले सभी क्षेत्रों का नियंत्रण लेबनानी सशस्त्र बल (एलएएफ) को सौंप देगा।

श्री नेतन्याहू ने वाशिंगटन में समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद कहा कि लेबनान के साथ लंबी वार्ता इजरायल के पक्ष को मजबूत करने वाले परिणाम देने में सफल रही है। उन्होंने कहा कि लेबनान के भीतर सुरक्षा क्षेत्र में इजरायली सेना की निरंतर मौजूदगी इस समझौते की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है।

श्री नेतन्याहू ने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में बना रहेगा। यह एक बड़ी उपलब्धि है और जब तक हिजबुल्ला निरस्त्र नहीं हो जाता तथा इजरायल के लिए खतरा बना रहता है, तब तक हम वहां बने रहेंगे।” यह जानकारी वाईनेट न्यूज ने दी।

उन्होंने इस समझौते को क्षेत्र में ईरान के प्रभाव के लिए बड़ा झटका बताते हुए कहा, “यह ईरान के लिए भी गंभीर झटका है। मूल रूप से इजरायल, लेबनान और अमेरिका उन्हें यह कह रहे हैं कि ‘यह आपका मामला नहीं है।'”

श्री नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल टैंक रोधी मिसाइलों की मारक सीमा से बाहर अपने मूल सुरक्षा क्षेत्र को बनाए रखेगा, जबकि इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) की सिफारिश पर शुरू किये गये एक पायलट कार्यक्रम के तहत लेबनानी सेना को निर्धारित क्षेत्रों में धीरे-धीरे नियंत्रण स्थापित करने की अनुमति दी जायेगी।

इस रूपरेखा समझौते की घोषणा शुक्रवार को वाशिंगटन में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजरायल के राजदूत येचियल लेइटर और लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मावाद की उपस्थिति में की। इसका उद्देश्य इजरायल और हिजबुल्ला के बीच हुए समझौते के बाद व्यापक शांति समझौते की दिशा में एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करना है।

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी समझौते के पाठ के अनुसार, सुरक्षा परिस्थितियों के अनुकूल होने पर लेबनानी क्षेत्र से इजरायली बलों की चरणबद्ध वापसी का प्रावधान किया गया है।

दस्तावेज के अनुसार, दोनों देशों ने “संघर्ष को निर्णायक रूप से समाप्त करने और इसके मूल कारणों का समाधान करने” की इच्छा व्यक्त की है। लेबनान ने अपने पूरे क्षेत्र में पूर्ण सरकारी नियंत्रण बहाल करने की प्रतिबद्धता जतायी है। इसमें सभी गैर-राज्य सशस्त्र समूहों का निरस्त्रीकरण भी शामिल है।

समझौते के तहत लेबनानी सशस्त्र बल पूरे देश में सुरक्षा और सैन्य नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालेगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है, जिनसे इजरायली रक्षा बल लेबनानी क्षेत्र से चरणबद्ध तरीके से अपनी तैनाती समाप्त कर सकें।

चरणबद्ध प्रक्रिया के कार्यान्वयन, सुरक्षा व्यवस्था, सत्यापन तंत्र तथा इजरायली सेना की वापसी की समयसीमा सहित विस्तृत प्रावधान एक अलग परिशिष्ट में शामिल किए जाएंगे, जिसे अमेरिका के समन्वय से तैयार किया जायेगा।

रूपरेखा समझौते में दक्षिणी लेबनान के दो पायलट क्षेत्रों की भी पहचान की गई है, जहां इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से नियंत्रण लेबनानी सैनिकों को सौंपेगी, हालांकि इन क्षेत्रों के नाम गोपनीय रखे गये हैं।

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