नयी दिल्ली, 27 जून (वार्ता) केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार देश का न्यूट्रास्यूटिकल (पोषण-आधारित स्वास्थ्य उत्पाद) बाज़ार तीव्र वृद्धि के चरण में प्रवेश कर चुका है और यह वर्ष-प्रति-वर्ष लगभग 10.50 प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में इसका मूल्य लगभग 29-30 अरब डॉलर था, जिसके 2026 तक 37–38 अरब डॉलर तथा 2030 तक बढ़कर लगभग 55–57 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है जो वर्ष-प्रति-वर्ष औसतन लगभग 10.50 प्रतिशित की वृद्धि दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेज़ वृद्धि के बावजूद, न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें लगातार बदलता नियामकीय ढांचा, उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी, उत्पादों से जुड़े भ्रामक दावे तथा कुछ उत्पादों के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाणों का अभाव शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग तेज़ी से विकसित हो रहा है। इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं, उपभोक्ताओं में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को लेकर बढ़ती चिंताएं तथा पर्याप्त पोषण की कमी। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ई-कॉमर्स के विस्तार के साथ-साथ सरकार की सहयोगी नीतियां और पहल भी इस क्षेत्र की वृद्धि को गति दे रही हैं। भारत का मजबूत जैव-कृषि आधार और विविध कृषि फसलें कच्चे माल की उपलब्धता इस उद्योग के लिए एक प्राकृतिक लाभ की स्थिति प्रदान करती हैं। प्रधानमंत्री कृषि संपादा योजना (पीएमकेएसवाई), खद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना तथा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औचारिक क्षेत्र में लाने की योजना (पीएमएफएमई) जैसी योजनाओं से भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहन मिल रहा है। बेहतर नियामकीय व्यवस्था, मानकीकरण तथा गुणवत्ता नियंत्रण उपायों के माध्यम से इस उद्योग को सशक्त बनाया जा रहा है।
भारत में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाओं की पहल से नियामकीय अनुपालन मजबूत हो रहा है। केयरएज रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक रंजन शर्मा ने कहा, “ भारत का न्यूट्रास्यूटिकल क्षेत्र अब केवल वेलनेस (स्वास्थ्य संवर्धन) तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि निवारक स्वास्थ्य सेवा (का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उपभोक्ता अब रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी), बेहतर पोषण और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी कारण हमें उम्मीद है कि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भी दो अंकों की वार्षिक वृद्धि दर्ज करता रहेगा। ” केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट निदेशक प्रीतेश राठी ने कहा, “ दैनिक उपभोग के सामान बनाने वाली बड़ी एफएमसीजी कंपनियों द्वारा मध्यम आकार के न्यूट्रास्यूटिकल ब्रांडों का अधिग्रहण इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
वर्तमान में फंक्शनल फूड्स और पेय पदार्थ कुल खपत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जबकि निर्यात भी तेज़ी से बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप भारत का न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग लगातार अधिक व्यापक, उन्नत और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ स्वरूप की ओर अग्रसर है। ” केयरएज रेटिंग्स ने यह भी चेतावनी दी है कि तेज़ वृद्धि के बावजूद उद्योग को अभी कई नियामकीय और विश्वसनीयता संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें बिना पर्याप्त प्रमाण वाले उत्पाद दावे, कुछ श्रेणियों में सीमित वैज्ञानिक प्रमाण, तथा विभिन्न बाज़ारों में उपभोक्ता जागरूकता का असमान स्तर शामिल हैं। यदि उद्योग को विस्तार के साथ उपभोक्ताओं का विश्वास बनाए रखना है, तो इन चुनौतियों का समाधान आवश्यक होगा। रिपोर्ट के अनुसार, उत्पाद दावों के सत्यापन की अधिक सुदृढ़ व्यवस्था, स्पष्ट और समयबद्ध नियामकीय प्रक्रियाएं, तथा मानकीकरण के निरंतर प्रयास इस क्षेत्र की विकास क्षमता को दीर्घकालिक, स्थायी और मूल्य-सृजनकारी विकास में बदलने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।

