200 साल पुरानी परंपरा: मंदिर पर रुककर ताजियों ने दी सलामी, दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

दतिया: जिले के भांडेर नगर में मोहर्रम के अवसर पर एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिली। नगर में निकाले गए ताजिये अपने निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए प्राचीन चतुर्भुज कृष्ण मंदिर के सामने रुके, जहां ताजियेदारों ने श्रद्धापूर्वक सलामी दी। इसके बाद ताजिये अपने अगले पड़ाव की ओर रवाना हुए।
बताया जाता है कि यह परंपरा लगभग 200 वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि मंदिर के निर्माण में स्थानीय मुस्लिम परिवारों का भी सहयोग रहा था, जिसके चलते मोहर्रम के दौरान ताजियों द्वारा मंदिर पर रुककर सलामी देने की परंपरा शुरू हुई। समय के साथ यह परंपरा सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का प्रतीक बन गई।
मंदिर परिसर में ताजियों के पहुंचने पर पुजारियों द्वारा उनका स्वागत किया गया तथा सभी धर्मों के लोगों ने एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हुए प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया।

इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदू एवं मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे।नगर के विभिन्न मोहल्लों से निकले ताजिये मंदिर पर सलामी देने के बाद कर्बला की ओर रवाना हुए, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।भांडेर की यह ऐतिहासिक परंपरा न केवल दतिया जिले बल्कि पूरे प्रदेश में गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की मिसाल मानी जाती है। हर वर्ष मोहर्रम पर यह दृश्य लोगों को प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान का संदेश देता है।

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