
जबलपुर: जबलपुर में करीब 3 लाख 10 हजार संपत्तियां वर्तमान समय में हैं जिनमें से हजारों की संख्या में ऐसी संपत्तियां हैं जिनके मालिकों ने स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण करवाकर रखा है। लिहाजा ऐसी स्थिति में नगर निगम में कंपाउंडिंग शुलक का प्रावधान है लेकिन लोग ये प्रक्रिया नहीं इस्तेमाल करते जिसका नतीजा निकलकर आता है कि नगर निगम जबलपुर को हर वर्ष करोड़ों रुपयों का चूना लग जाता है। इसलिए अब नगर निगम कमिश्नर प्रीति यादव ने जो आदेश निकाला है वह काफी चर्चाओं में बना हुआ है।
जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिन भी संपत्तिधारकों ने अपने भवनों को स्वीकृत सीमा से अधिक निर्माण किया है वे 30 मई तक खुद नगर निगम के राजस्व विभाग में आकर वास्तविक निर्माण सीमा दर्ज करवा लें, नहीं तो इसके बाद उन्हें 5 गुना तक फाइन देना पड़ सकता है। आदेश के मुताबिक निरीक्षण-जांच के बाद अगर कोई लापरवाही इस काम में सामने आएगी तो संभागीय अधिकारी और राजस्व निरीक्षकों पर भी कार्रवाई की जाना बिल्कुल तय माना जा रहा है।
निगमायुक्त के सख्त तेवर के बाद संभागीय अधिकारी और राजस्व निरीक्षक अलर्ट मोड पर हैं। मतलब साफ है कि नगर निगम द्वारा जो संपत्तिधारकों व मकानमालिकों को 30 मई तक का समय दिया गया है उसके अंदर ही मकान मालिक नगर निगम के राजस्व रिकॉर्ड में अपना डाटा दुरूस्त करा लें इसके बाद राजस्व निरीक्षक और संभागीय अधिकारियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र के मकानों का निरीक्षण शुरू कर दिया जाएगा।
कुछ इस तरह है संपत्तियों का आंकड़ा
जानकारी के अनुसार करीब 100 करोड़ के आसपास प्रतिवर्ष नगर निगम को संपत्ति कर आता है । वहीं बीते 10 सालों में करीब 65 हजार संपत्तियां विभाग द्वारा नई खोजी गईं हैं। निगम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार नगर निगम के रिकॉर्ड में 3 लाख 10 हजार संपत्तियां जबलपुर की दर्ज हैं।
इनका कहना है
–स्वीकृत नक्शे से अधिक जिन मकान मािलकों ने निर्माण किया है वह खुद 30 मई तक राजस्व विभाग में आकर सही सही जानकारी देकर रिकॉर्ड दुरूस्त करा लें। इसके बाद की तारीख पर संपतिधारकों पर 5 गुना अधिक जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही लापरवाही बरतने पर संभागीय अधिकारी, राजस्व निरीक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी।
— प्रीति यादव, कमिश्नर, नगर निगम
