20 साल में गायब हो गई 3% हरियाली, सीहोर में घटते जंगलों के बीच वन विभाग का ऑपरेशन क्लीन

सीहोर/ भैरूंदा। मानसून की दस्तक के साथ ही जिले में वन भूमि पर अवैध कब्जे और खेती की कोशिशें फिर तेज हो गई हैं. बारिश से पहले जंगलों की पालवा साफ कर वन भूमि को खेती योग्य बनाने का खेल शुरू हो गया है. इस पर सख्ती दिखाते हुए लाड़कुई वन विभाग ने तीन दिन के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना पंजीयन नंबर वाले ट्रैक्टर को हल-बखर सहित जब्त किया है. विभाग का कहना है कि वन भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रकाश चंद्र उईके ने बताया कि सूचना मिलने पर दल प्रभारी ओम कुमार गोयल के नेतृत्व में वन अमला मौके पर पहुंचा. टीम में बीट प्रभारी संजीत अहिरवार, संतोष वर्मा, प्रेम सागर बागवान सहित सुरक्षा श्रमिक शामिल थे. जंगल में पहुंचने पर पाया गया कि जिस भूमि को पिछले वर्ष कड़ी कार्रवाई के बाद अतिक्रमण से मुक्त कराया गया था, उसी स्थान पर एक व्यक्ति ट्रैक्टर से बोवनी कर रहा था. वन अमले ने घेराबंदी कर आरोपी जगदीश को पकड़ लिया.

जांच के दौरान आरोपी वन भूमि पर खेती करने संबंधी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका. इसके बाद ट्रैक्टर और कृषि उपकरण जब्त कर वन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया. आरोपी 0.337 हेक्टेयर वन भूमि को नुकसान पहुंचाकर कब्जे का प्रयास कर रहा था. वन विभाग के अनुसार पूर्व में भी नयापुरा परिक्षेत्र में नौ अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है. वहां पालवा साफ कर वन भूमि पर बोवनी कर दी गई थी. लगातार अभियान चलाकर अब तक कुल 10.125 हेक्टेयर बेशकीमती वन भूमि को भू माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया गया है.

हर साल घट रही हरियाली, बढ़ रही चिंता

वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण का असर जिले की हरियाली पर भी दिखाई दे रहा है. इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) के अनुसार वर्ष 2001 में जिले में हरित क्षेत्र 16 से 17 प्रतिशत के बीच था, जो 2010 में घटकर 15 प्रतिशत रह गया. वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट में यह केवल 14 प्रतिशत दर्ज किया गया है. यानी दो दशक में जिले की हरियाली करीब 3 प्रतिशत कम हो गई है. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले का कुल वन क्षेत्र करीब 1.52 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 30 हजार हेक्टेयर वन विकास निगम के अधीन है. वहीं लगभग पांच हजार वनाधिकार पट्टे जारी होने से 15 से 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि गतिविधियां संचालित हो रही हैं. इसके अलावा करीब 25 हजार हेक्टेयर वन भूमि आज भी अतिक्रमण की चपेट में है, जहां अवैध खेती की जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अतिक्रमण पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो जिले का हरित क्षेत्र और तेजी से घट सकता है.

सतत जारी रहेगा विशेष अभियान

वन भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ वन विभाग का विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा. इसके लिए विशेष गश्ती दल बनाए गए हैं. वन भूमि पर कब्जा करने वाले किसी भी अतिक्रमणकारी को बख्शा नहीं जाएगा.

प्रकाशचंद्र उईके,
वन परिक्षेत्राधिकारी

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