
जबलपुर। प्राथमिक शिक्षक ने सेवा से बर्खास्त किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता को धोखाधड़ी के प्रकरण में ट्रायल कोर्ट द्वारा सजा से दंडित किया गया है। एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि न्यायपूर्ण व निष्पक्षता के खिलाफ न्यायालय अपने अधिकार का उपयोग कर राहत नहीं दे सकता है।
सिहोर निवासी रघुनंदन चौधरी की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि दायर याचिका में कहा गया था कि वह प्राथमिक शिक्षक के पद पद पदस्थ था। विभागीय जांच के बिना की उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। विभागीय जांच किये बिना सेवा से बर्खास्त किये जाने की कार्यवाही मध्य प्रदेश सिविल सर्विसेज़ रूल्स के खिलाफ है।
शासन की तरफ से याचिका का विरोध करते हुए बताया गया कि ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता को धारा 420,467 तथा 120 बी के तहत दोषी करार देते हुए सजा से दंडित किया था। जिसके बाद विभाग ने उसे बर्खास्त किया है। सजा से दोषी व्यक्ति को नौकरी में रखना प्रशासनिक हित में नहीं होगा। उसे नैतिक भ्रष्टाचार का दोषी मानने से सजा से दंडित किया गया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश के साथ याचिका को खारिज कर दिया। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता के स्वतंत्रता दी है कि सजा के अपील दायर अपील सफल हो जाती है तो बर्खास्ती के खिलाफ याचिका दायर कर सकता है। शासन की तरफ से अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने पैरवी की।
