
बीना। क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई उस समय चर्चा का विषय बन गई जब एसडीएम विजय डेहरिया को ग्रामीणों ने ही रोक लिया। मामला मंगलवार का है, जब एसडीएम टीम के साथ भानगढ़ पहुंचे और दो झोलाछाप डॉक्टरों मलखान पटेल व देवेंद्र सिंह के क्लीनिक पर छापामार कार्रवाई की।दोनों क्लीनिक बिना वैधानिक अनुमति के संचालित किए जा रहे थे। यहां बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं मिलीं और एक क्लीनिक पर तो मरीजों को भर्ती करने की सुविधा भी मौजूद थी।जब एसडीएम कार्रवाई कर रहे थे,तभी करीब दो दर्जन ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और उन्होंने एसडीएम का रास्ता रोक लिया। ग्रामीणों का कहना था कि यदि झोलाछापों पर कार्रवाई की जा रही है,तो पहले सरकारी अस्पताल का भी निरीक्षण किया जाना चाहिए क्योंकि वहां डॉक्टर व सुविधाओं की भारी कमी है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में आए दिन डॉक्टर अनुपस्थित रहते हैं और न तो पर्याप्त दवाएं मिलती हैं और न ही इलाज की सही व्यवस्था होती है। इस पर एसडीएम ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि वे अस्पताल का निरीक्षण भी करेंगे।बाद में एसडीएम विजय डेहरिया ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। यहां डॉक्टर यशवंत तिवारी सहित स्टाफ मौजूद मिला, लेकिन दवाओं की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम थी।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसडीएम के आने की सूचना पहले ही अस्पताल कर्मियों को मिल गई थी, इसलिए सभी समय पर मौजूद दिखे।एसडीएम ने दोनों झोलाछाप क्लीनिकों को सील कर दिया और बीएमओ डॉ.संजीव अग्रवाल को विधिसम्मत कार्रवाई के निर्देश दिए।ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकारी अस्पताल की स्थिति सुधर जाए तो झोलाछाप डॉक्टरों की आवश्यकता ही नहीं रहेगी।
