रूस से ‘सस्ते तेल’ की ‘डील’ रहेगी ‘जारी’: ‘भारत’ ने ‘वैश्विक दबाव’ के बावजूद लिया ‘बड़ा फैसला’, क्या ‘ऊर्जा सुरक्षा’ बनी ‘प्राथमिकता’?

‘भारत-रूस’ तेल व्यापार पर ‘अंतर्राष्ट्रीय’ नजर, ‘रियायती मूल्य’ पर ‘खरेद जारी’, ‘देश हित’ को ‘सर्वोपरि’ रखा गया!

वाशिंगटन डीसी, 02 अगस्त 2025: भारत ने एक बार फिर अपने ऊर्जा सुरक्षा हितों को सर्वोपरि रखते हुए रूस से सस्ते तेल की खरीद जारी रखने का बड़ा फैसला लिया है, भले ही इस पर वैश्विक दबाव बना हुआ हो। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने रियायती मूल्य पर रूसी तेल का आयात जारी रखकर अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। यह निर्णय भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस फैसले से भारत के लिए कच्चे तेल की लागत कम रखने में मदद मिल रही है, जिससे देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में आसानी हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कुछ देशों द्वारा इस व्यापार पर सवाल उठाए जाने के बावजूद, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही व्यापारिक संबंध स्थापित करेगा। भारत और रूस के बीच यह तेल व्यापार दोनों देशों के पुराने और मजबूत संबंधों का भी प्रतीक है। अब देखना यह होगा कि वैश्विक स्तर पर इस फैसले की क्या प्रतिक्रिया होती है और क्या अन्य देश भी इसी तरह के कदम उठाते हैं।

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