राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर विवाद के बीच, तिरुपति मंदिर प्रबंधन ने हिसाब-किताब मजबूत करने के लिए आईसीएआई से साधा संपर्क

नयी दिल्ली, 26 जून (वार्ता) अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी की राष्ट्रव्यापी चर्चाओं के बीच भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) को आंध्र प्रदेश में प्रसिद्ध तिरुपति तिरुमला मंदिर की ओर से वहां के आय-व्यय की लेखा एवं ऑडिट प्रणाली को और सशक्त बनाने का काम मिला है।

आईसीएआई के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं के साथ एक बातचीत में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के धन की कथित चोरी और मंदिरों की आडिट व्यवस्था के बारे में पूछे एक सवाल पर कहा कि तिरुपपति तिरुमला देवस्थानम (टीटीडी) ने अपनी लेखा और आडिट व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए हमें व्यवस्था सुझाने का काम सौंपा है। उन्होंने कहा, ‘टीटीडी की लेखा व्यवस्था पहले से बड़ी मजबूत है, पर वे चाहते है कि उसे और सशक्त किया जाए। हम उनका अध्ययन कर एक नया ढांचा (फ्रेमवर्क) तैयार कर रहे हैं।”

आईसीएआई अध्यक्ष ने कहा कि टीटीडी की इस परियोजना के लिए अकाउंटिंग रिसर्च फाउंडेशन शोध करेगा और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेगा। श्री कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य टीटीडी को एक मॉडल के रूप में विकसित करना है। यहां जो भी प्रणाली तैयार की जाएगी, उसे अन्य धार्मिक संस्थानों में भी लागू किया जा सकेगा।”

आईसीएआई अध्यक्ष ने कहा, ” नया फ्रेमवर्क (ढांचा) अगले 100 दिनों के भीतर तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। टीटीडी की लेखा-जोखा और आडिट व्यवस्था के लिए हम जो ढांचा तैयार कर रहे हैं उसे भविष्य में अन्य धार्मिक और उस तरह के अन्य संस्थानों में भी लागू किया जा सकता है।”

श्री कुमार ने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद पर कोई टिप्पणी किये बगैर कहा कि मंदिर हो या कोई अन्य संस्थान ‘ व्यवस्था तो यही होनी चाहिए कि एक भी पैसा आए, उसके आने और खर्च होने का पक्का हिसाब होना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संस्था में मजबूत जोखिम प्रबंधन (रिस्क मैनेजमेंट) और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली होना बेहद आवश्यक है। यदि कहीं थोड़ी-सी भी चूक या कमजोरी रह जाए, तो धन की हेराफेरी या चोरी की संभावना बढ़ जाती है।

आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर दुनिया का सबसे समृद्ध हिंदू मंदिर माना जाता है। उसका प्रबंधन टीटीडी करता है और वहां का बजट करीब साढे़ पांच हजार करोड़ रुपये का है।

श्री कुमार ने कहा कि टीटीडी की अपनी आंतरिक लेखा प्रणाली है और उसकी लेखा व्यवस्था में 6-7 बड़ी घरेलू फर्में लगी हैं। उन्होंने कहा, “इसके बावजूद वे अपनी व्यवस्था को और बेहतर बनाकर अगले स्तर पर ले जाना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने हमारी सहायता मांगी और हमने यह परियोजना शुरू की है।”

उन्होंने बताया कि संस्थान इस परियोजना के तहत दान और आय के स्रोतों से लेकर धन के अंतिम उपयोग तक पूरी वित्तीय प्रक्रिया की समीक्षा करेगा। इसमें हुंडी में मिले धन और दूसरी सामग्री के हिसाब किताब का तरीका भी शामिल होगा।

 

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