वाराणसी, 26 जून (वार्ता) भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक नगरी काशी आज भी अपनी गौरवशाली परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत और सनातन पहचान के लिए विश्वभर में जानी जाती है।
इस पावन नगरी के कण-कण में सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना का दिव्य स्वरूप समाहित है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर 29 जून को अस्सी मार्ग स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य महास्नान एवं जलाभिषेक किया जाएगा।
जलाभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ 14 दिनों के लिए अस्वस्थ होकर अज्ञातवास में चले जाते हैं। इस अवधि में प्रभु को औषधीय काढ़े का भोग लगाया जाता है तथा महाप्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। 14 जुलाई को स्वस्थ होकर भगवान जगन्नाथ पुनः भक्तों को दर्शन देंगे। इस दिन के दर्शन को अत्यंत दुर्लभ एवं मंगलकारी माना जाता है।
ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि 15 जुलाई को भव्य डोली यात्रा अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर से निकाली जाएगी। 16 से 18 जुलाई तक भव्य रथयात्रा मेले का आयोजन होगा। 16 जुलाई को मंगला आरती के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा रथ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। तीनों दिनों प्रातः पांच बजे प्रभु की भव्य एवं दिव्य आरती होगी। शाम आठ बजे शयन आरती तथा रात्रि 12 बजे भी आरती की जाएगी। 18 जुलाई की रात्रि महाआरती के साथ रथयात्रा मेले का समापन होगा। 19 जुलाई को भगवान जगन्नाथ पुनः अस्सी स्थित मंदिर में विराजमान होंगे।
