जल माफियाओं का दुस्साहस: रात के अंधेरे में उजाड़ा जीरन तालाब के वेस्ट वीयर का निर्माण कार्य, ग्रामीणों में भारी आक्रोश  

जीरन। नगर की जीवनदायिनी और ऐतिहासिक रियासत कालीन जीरन तालाब के अस्तित्व पर कुछ स्वार्थी तत्वों की नजर लग गई है। तालाब के डूब क्षेत्र में अवैध रूप से खेती करने वाले कुछ रसूखदार किसानों के कारण न सिर्फ तालाब का वजूद खतरे में पड़ गया है। बल्कि पूरे नगर के विकास कार्य भी ठप हो रहे हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा तालाब की वेस्ट वीयर (चादर) की मरम्मत और उसकी ऊंचाई बढ़ाने का काम शुरू किया गया था। जो इन अवैध कब्जाधारियों को रास नहीं आया। नतीजतन रात के अंधेरे में तालाब के दुश्मनों ने सरकारी विकास कार्य को तहस-नहस कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों और आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।

आधी रात को साजिश: ठेकेदार की मेहनत पर फेरा पानी

प्राप्त जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग ने तालाब को मजबूती देने के लिए वेस्ट वीयर की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया था। निर्माण एजेंसी के ठेकेदार ने दिनभर पसीना बहाकर कंक्रीट फिलिंग के लिए सरियों का एक मजबूत जाल बिछाया था और सेंटिंग लगाई थी। अगले ही दिन यहाँ आरसीसी का काम होना तय था। लेकिन काले कारनामे की हद पार करते हुए आधी रात के बाद तालाब के डूब क्षेत्र पर अवैध कब्जा जमाए बैठे कुछ किसानों ने मौके पर पहुंचकर सेंटिंग और सरियों का कीमती जाल उखाडक़र फेंक दिया। सुबह जब काम बंद मिला तो यह खबर नगर में आग की तरह फैल गई और ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

विधायक परिहार से मिला प्रतिनिधी मंडल, विधायक परिहार की दो टूक

अवैध खेती करने वालों की इस कायराना हरकत के खिलाफ भाजपा दक्षिण मंडल अध्यक्ष मदन गुर्जर और नपा उपाध्यक्ष मुकेश राव तावरे के नेतृत्व में किसानों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार से मिला और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया। विधायक परिहार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री आर.सी. भाभर से फोन पर बात की और सख्त लहजे में निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि जीरन तालाब नगर के पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए आरक्षित है। इसके विकास और सुरक्षा के कार्य में अड़चन डालने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने काम को जल्द से जल्द दोबारा पूरा कराने के निर्देश देते हुए कहा कि बजट की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। इस पर यंत्री आर.सी. भाभर ने आश्वस्त किया कि पुलिस और प्रशासन के सहयोग से जल्द ही वेस्ट वीयर की मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाने का काम दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।

45 साल बाद लौटेगा तालाब का असली स्वरूप –

जीरन वासियों का कहना है कि तालाब के इतिहास और तकनीकी स्थिति के मध्येनजर इसकी जलभराव क्षमता को बढ़ाना अब बेहद जरूरी हो चुका है। मूल स्वरूप एफटीएल 1555 फीट: तालाब के निर्माण के समय इसका फुल टैंक लेवल 1555 फीट निर्धारित था।

क्यों घटाया गया था स्तर

करीब 40-45 साल पहले राजपूत मोहल्ला की निचली बस्ती में पानी भरने की आशंका और मुख्य पिचिंग वॉल कमजोर होने के कारण अस्थाई रूप से जल स्तर को 1 फीट घटाकर 1554 फीट कर दिया गया था। वर्तमान में तालाब की पिचिंग वॉल बेहद मजबूत हो चुकी है और अब किसी भी बस्ती में पानी डूबने का कोई खतरा नहीं है।

सिंचाई के साथ-साथ अब पेयजल का भी मुख्य आधार

जीरन तालाब अब सिर्फ खेतों की प्यास नहीं बुझाता बल्कि शासन ने इसे नगर की पेयजल योजना के लिए भी पूरी तरह आरक्षित कर दिया है। तालाब के किनारे ही आधुनिक फिल्टर प्लांट का निर्माण किया गया है। ऐसे में पूरे नगर की प्यास बुझाने के लिए तालाब को उसके पुराने निर्धारित स्तर (1555 फीट) तक भरना बेहद अनिवार्य और जनहित में है।

प्रतिनिधिमंडल ने की आरोपियों पर रासुका लगाने की मांग

विधायक को शिकायत सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से नहर समिति अध्यक्ष शांतिलाल तूफान पार्षद प्रतिनिधि बबलू भीलावत, भाजपा नेता कुंदन शर्मा, अभय पोरवाल, प्रभूलाल माली, हस्तीमल भरानिया सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के आक्रोशित किसान और जागरूक नागरिक उपस्थित थे। नगरवासियों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि शासकीय कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले इन जल माफियाओं को चिन्हित कर उन पर तत्काल रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

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