
आलीराजपुर। मध्य प्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष श्री एस.एन. मिश्रा की अध्यक्षता में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में प्रशासनिक इकाईयों के परिसीमन एवं युक्तियुक्तकरण के संबंध में बैठक की गई। बैठक में पुनर्गठन आयोग के सचिव श्री अक्षय कुमार सिंह, सदस्य श्री मुकेश कुमार शुक्ला, जिला कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती संघमित्रा गौतम, अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास,एसडीएम सुश्री निधि मिश्रा सहित जिले के अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासनिक इकाईयों जिला, उपखण्ड, तहसील एवं जनपद या विकासखंडों के परिसीमन (सृजन एवं सीमाओं में परिवर्तन) एवं युक्तियुक्तकरण के लिए प्रस्ताव लिए जाएंगे। आयोग के अध्यक्ष श्री मिश्रा ने कहा कि पुनर्गठन हेतु सुलभ गवर्नेंस के लिए 4 टर्म्स ऑफ रिफरेंस निर्धारित किए हैं। पहला भौगोलिक परिस्थितियों एवं जनअपेक्षाओं के आधार पर प्रशासन की सुलभ पहुंच के आधार पर पुनर्गठन हो, दूसरा कार्यों के अनुपात में पदों की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए पदीय संरचना के युक्तियुक्तकरण की अनुशंसाएं हों, तीसरा इकाईयों का भ्रमण कर अमले का गठन करना, चौथा प्रशासनिक इकाईयों की दक्षता बढ़ाने हेतु अन्य अनुशंसाएं करना। अध्यक्ष श्री मिश्रा ने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों, जनोन्मुखी एवं सुलभ प्रशासन पहुंच के अनुसार सीमाओं के पुनर्गठन की अनुशंसाएं हों। विभागों की अपनी कार्ययोजना एवं जनभागीदारी सुनिश्चित हो एवं अनुभाग, तहसील एवं ब्लॉक के पुनर्गठन को लेकर आवश्यक सुक्षाव प्रस्तुत किए जाएं।
इस संबंध में एक प्रश्नावली के आधार पर पुनर्गठन हेतु प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। प्रश्नवाली की पूर्ति के संबंध में आयोग के सदस्य मुकेश कुमार शुक्ला के द्वारा विस्तृत जानकारी दी। जिसमें उन्होंने बताया कि प्रशासनिक इकाई के पुनर्गठन, युक्तियुक्तकरण व विलोपन को लेकर प्रश्नावली तैयार की गई हैं। जिसमेें भौगोलिक कारक, आवागमन, क्षेत्रफल, प्रशासनिक सुविधा, प्रशासनिक दक्षता, बुनियादी सुविधाओं, आर्थिक करकों, जनसांख्यिकीय करकों, सांस्कृतिक व सामाजिक कारकों, सुरक्षा व विधि व्यवस्था, जनसुविधा, आबादी घनत्व, व्यापार व उद्योग बाहुल्य के आधार पर पुनर्गठन, युक्तियुक्तकरण व विलोंपन आदि बिन्दुओं पर प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा।
बैठक में पुनर्गठन आयोग के सचिव श्री अक्षय कुमार सिंह तहसीलवार अधिकारियों की बैठक भी ली जिसमें प्रशासकीय संरचनाओं के पुनर्गठन सहित प्रशासनिक सेवाएं सुदृढ़ तरीके से आमजन तक त्वरित रूप से पहुंचाने के संबंध में सुझाव लिए। साथ ही उन्होंने कहा कि एक आदर्श तहसील कैसी होनी चाहिए,उनकी सीमाएं कैसी हो,इस पर सुझाव मांगे। इस दौरान राजस्व विभाग की ओर से बताया गया कि एक ही जिले में उसका पूरा विधानसभा क्षेत्र हो। तहसील और जनपद की सीमा एक ही हो। जनजातीय जिलों में वसूली के लक्ष्य व्यवहारिक हो। किसी भी जनकल्याण योजनाओं हेतु आयोजित दो शिविरों में पर्याप्त समयावधि दी जाएं। हर विभाग की योजनाओं की प्रगति मॉनिटरिंग के लिए हर विभाग का केवल एक ही पोर्टल हो। बड़ी पंचायतों में अतिरिक्त स्टाफ हो ताकि कार्य सुचारू और समयबद्ध तरीके से संपादित किए जा सके। सीईओ जनपद से सुझाव आए कि सचिव और सरपंच कम से कम स्नातक हो। तहसीलदार ने बताया कि प्रशासनिक कार्यों में राजनीतिक हस्तक्षेप कम हो। अनुविभागीय अधिकारी को अनुभाग का नोडल अधिकारी के रूप में बनाया जाए। अधिकारियों के स्थानांतरण में कोई राजनीतिक दबाव न हो और पटवारी के हर 4 साल में स्थानांतरण प्रशासनिक दृष्टि से हो सहित कई सुझाव आयोग सदस्य के समक्ष रखे गए। बैठक के अंत में कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर द्वारा आयोग के सदस्य को जिले की मोटे अनाज की फूड बास्केट, पिथोरा पेंटिंग और आदिवासी संस्कृति की तीर कमान प्रतिक चित्र के रूप में भेंट की गई ।बैठक में समस्त तहसीलदार, जनपद सीईओ, नगर पालिका सीएमओ सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
