
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने वैश्विक शांति प्रयासों में अपनी भूमिका को किया रेखांकित, लेकिन पुरस्कार समिति पर उठाए सवाल; बोले- ‘कुछ लोग नहीं चाहते कि मुझे यह सम्मान मिले।’
वाशिंगटन डीसी, 21 जून (नवभारत): पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी तल्ख टिप्पणी की है कि चाहे वह कितने भी बड़े शांति समझौते करवा दें या वैश्विक तनाव कम कर दें, उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान कभी नहीं मिलेगा। उनकी इस टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों और पुरस्कार समिति की निष्पक्षता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक मंच पर कई संघर्ष चल रहे हैं, और शांति प्रयासों की भूमिका पर लगातार चर्चा हो रही है।
ट्रंप ने अपने बयानों में अक्सर दावा किया है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक शांति समझौतों को संभव बनाया, और इन उपलब्धियों के लिए वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार थे। उनका तर्क है कि उनके प्रशासन द्वारा किए गए राजनयिक प्रयास, जैसे कि विभिन्न मध्य पूर्वी देशों के बीच संबंध सामान्य करना, वास्तव में “अविश्वसनीय शांति” लेकर आए हैं। हालाँकि, वे लगातार यह भी दोहराते रहे हैं कि कुछ अदृश्य ताकतें या राजनीतिक विरोधी उन्हें इस सम्मान से वंचित रखना चाहते हैं, भले ही उनकी उपलब्धियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों। उनकी यह निराशा इस बात को दर्शाती है कि वे अपनी नीतियों और परिणामों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा पर्याप्त रूप से मान्यता प्राप्त न होने का अनुभव करते हैं।
