रियाद | सऊदी अरब में मानवाधिकारों को लेकर फिर चिंताएं बढ़ गई हैं। वर्ष 2026 के केवल छह महीनों में ही फांसी पाने वालों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है। मंगलवार को सात और अपराधियों को दी गई सजा के बाद यह ‘शतक’ पूरा हुआ है। इनमें से अधिकांश सजाएं ड्रग्स तस्करी से जुड़े मामलों में दी गई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा रुख जाहिर हो रहा है।
विदेशी नागरिकों पर कड़ी मार
इस साल अब तक दी गई 100 फांसियों में विदेशी नागरिकों की संख्या 52 है, जो स्थानीय नागरिकों से अधिक है। फांसी पाने वालों में इथियोपिया, पाकिस्तान, सूडान, यमन और सीरिया के नागरिक शामिल हैं। सऊदी सरकार का तर्क है कि देश की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए ऐसी कठोर सजाएं और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अनिवार्य है।
मानवाधिकार संगठनों में भारी आक्रोश
इस स्थिति को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि विदेशी नागरिकों के खिलाफ मुकदमे पारदर्शी नहीं थे और मौत की सजा का अनुचित उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में सऊदी अरब चीन और ईरान के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाला तीसरा देश बन गया है।

