इंदौर: मालवा निमाड़ जिलो में इन दिनों आदिवासी भगोरिया मेले में संस्कृति की झलक, जोश भरा नृत्य और अपार उत्साहआदिवासी मेला हर साल सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और आनंद का संगम बनकर आता है। इस मेले में चारों ओर रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान, लोकगीतों की गूंज और उत्साह से भरे नृत्य देखने को मिलते हैं।
जैसे ही ढोल-नगाड़ों की धुन बजती है, आदिवासी समुदाय के युवा और बुजुर्ग सभी झूम उठते हैं। पारंपरिक नृत्य, हाथों में थिरकती चूड़ियाँ, पैरों की घुंघरुओं की रुनझुन और चेहरे पर खुशी—सब कुछ मिलकर इस मेले को अविस्मरणीय बना देता है।
फोटो :अलीराजपुर जिले के उमरिया मेले का।
छाया कैलाश मित्तल।
